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Thursday, November 1, 2012

गांव लौटने पर लाना पड़ता है डिब्बे में पानी

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गोपेश्वर : मालबज्वाड़ और देवलकोट गांवों में गर्मी हो या सर्दी, पेयजल का संकट हमेशा बना रहता है। स्थिति यह है कि आज भी यहां टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है। सरकारी व्यवस्था के अलावा ग्रामीण अपने आप भी वाहनों में पानी लाकर किसी तरह प्यास बुझा रहे हैं। स्थिति यह है कि मवेशियों ने भरपेट पानी बारिश के मौसम के बाद शायद ही पिया हो। ग्रामीणों ने स्थिति से निपटने के लिए मवेशियों को पानी के स्रोत के पास छानियों में छोड़ रखा है।
जनपद चमोली के ब्लॉक थराली का 250 की जनसंख्या वाला देवलकोट और 225 की आबादी वाली मालबज्वाड़ ग्राम सभाएं पास-पास ही हैं। इन दोनों गांवों में पहले नौला तोक में पानी का स्रोत था। गांव वालों की जिंदगी हंसी खुशी कट रही थी, लेकिन दो दशक पूर्व पेयजल स्रोतों में पानी कम होना शुरू हुआ और करीब एक दशक पहले इन स्रोतों में पानी मात्र बारिश में ही उपलब्ध होने लगा। नतीजन ग्रामीण पेयजल संकट से परेशान हो उठे। पानी के लिए लगातार जन आंदोलन भी हुए।
ग्रामीणों के सूखे कंठ तर करने के लिए उत्तराखंड पेयजल निगम ने 2006 में गधेरा से गांव तक 18 किलोमीटर लंबी पेयजल योजना के लिए एक करोड़ 53 लाख का प्रस्ताव भेजा। 2010 में इस योजना को वित्तीय स्वीकृति मिली। 2011 में विभाग ने पेयजल लाइन के लिए दो बार निविदाएं आमंत्रित की, लेकिन दोनों बार एक ही ठेकेदार के निविदा में शामिल होने से कार्य शुरू नहीं हो पाया। विभाग ने इस योजना को स्वैप मोड में ग्रामीणों की ही पेयजल समिति बनाकर कार्य कराने की मंशा जाहिर की, परंतु इतने बड़े कार्य को करने में ग्रामीणों ने भी असमर्थता जताई। अब हालत यह है कि बारिश का पानी एकत्रित कर लोग किसी तरह जीवनचर्या आगे बढ़ाते हैं। शादी में मेहमानों को पहले ही समस्या से अवगत कराकर जरूरी कार्यो के लिए ही पानी उपलब्ध कराया जाता है। यहां तक कि जब गांव से ग्रामीण बाजार की ओर जाते हैं तो वापस लौटते हुए डिब्बे में पानी भरकर जरूर लाते हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
हमें पीने के लिए पानी नहीं मिलता, मवेशियों को कहां से पिलाएं। इसलिए हमने गांव से दूर दूसरे गांव की सीमा में पेयजल स्रोतों के पास छानियां बनाकर मवेशियों को रखा है।
मालती देवी, ग्राम प्रधान, देवलकोट
हमारे गांव में पानी का संकट है। इसलिए हम शादी बारिश के मौसम के दौरान ही करना उचित समझते हैं, ताकि पानी की समस्या से कार्य प्रभावित न हो। पेयजल योजना स्वीकृत होने से हमारी प्यास नहीं बुझेगी।
रघुवीर सिंह गुसांई, ग्राम प्रधान, मालबज्वाड़
क्या कहते हैं अधिकारी
यह सच है कि मालबज्वाड़ व देवलकोट गांव में पेयजल संकट है। टैंकरों से पानी भेजकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। गांवों के लिए स्वीकृत पेयजल योजना पर दो बार टेंडर हो चुके हैं, लेकिन एकल टेंडर के कारण इन्हें निरस्त करना पड़ा। अब दुबारा टेंडर आमंत्रित कर जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा। कार्य को त्वरित गति देने के लिए विभाग द्वारा वितरण टैंक से गांव तक का कार्य ग्रामीणों से ही कराने की कार्ययोजना बनायी है।
सुभाष चंद्र सुंद्रियाल, अपर सहायक अभियंता, उत्तरांचल पेयजल निगम
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मैं भी हूं राज्य आंदोलनकारी

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 मसूरी: फिल्म अभिनेता व लेखक तथा मसूरी निवासी विक्टर बैनर्जी ने प्रदेश सरकार से राज्य आंदोलनकारी का दर्जा और परिचय पत्र दिए जाने की मांग की है। जिलाधिकारी को भेजे पत्र में उन्होंने लिखा है कि उन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान प्रदर्शनों में बढ़चढ़कर भागीदारी की है।
बुधवार को भेजे पत्र में विक्टर बैनर्जी ने लिखा है कि खटीमा गोलीकांड व मसूरी गोलीकांड के बाद चार सितंबर 1994 को उनका एक लेख दि संडे टाइम्स में 'दि डे दि वाटर्स ऑफ दि सरयू टर्नड रेड' के नाम से अखबार के मुखपृष्ठ पर छपा था। जिससे पहली बार दिल्ली में बैठे संसद सदस्यों और सरकार चलाने वालों तथा देश की जनता के सामने उत्तराखंड आंदोलन की सही तस्वीर उभर कर सामने आई थी। उनके मुताबिक इसके बाद छह सितंबर 1994 को दि टेलीग्राफ समाचार पत्र में उनका लेख 'ब्लडीयड किंगडम ऑफ दि गॉड' छपा था जिसने उत्तराखंड की जनता की आवाज और यहां के राजनैतिक हालात से देश की जनता को अवगत करवाया था।
विक्टर बैनर्जी ने जिलाधिकारी को लिखा है कि उन्होंने टोरंटो कनाडा व कोलंबिया में दिए अपने भाषणों तक में उत्तराखंड आंदोलन का जिक्र किया और राज्य आंदोलन को अंतरराष्टीय मंचों तक पहुंचाया। इसीलिए उन्हें राज्य आंदोलनकारी मानते हुए आंदोलनकारी सम्मान परिचय पत्र निर्गत किया जाना चाहिए।
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अब रुद्रप्रयाग में भी हो सकेगी प्रदूषण जांच

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 रुद्रप्रयाग: वाहन चालकों व संचालकों को अपने वाहनों की प्रदूषण जांच के लिए अब देहरादून व ऋषिकेश के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। रुद्रप्रयाग में वाहन प्रदूषण जांच केंद्र खोला गया है। इसमें अभी केवल डीजल के वाहनों की जांच की जा रही है, शीघ्र पेट्रोल वाहनों की भी जांच भी हो सकेगी।
जिला मुख्यालय के बस अड्डे में परिवहन विभाग के स्वीकृति के बाद प्रदूषण जांच केंद्र खोला गया है। इसका लाभ रुद्रप्रयाग के साथ ही चमोली जिले के वाहन स्वामियों को भी मिलेगा। पूर्व में प्रदूषण की जांच की कोई सुविधा न होने से वाहन चालकों और स्वामियों को 150 रुपए में निर्गत होने वाले प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए लगभग डेढ़ हजार रुपए खर्च कर देहरादून व ऋषिकेश के चक्कर काटने पड़ते थे। वहीं चमोली व रुद्रप्रयाग के वाहन संचालकों के फिटनेस, रजिस्ट्रेशन सहित रोड टैक्स एआरटीओ कार्यालय में जमा होते है लेकिन प्रदूषण प्रमाण पत्र के लिए उन्हें चक्कर काटने पड़ते थे। प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक राजेश भट्ट ने बताया कि केंद्र में शुरुआत में डीजल वाहनों के प्रदूषण की जांच की जा रही है, लेकिन शीघ्र पेट्रोल वाहन की भी जांच की जाएगी। इसकी स्वीकृति के लिए परिवहन विभाग से शीघ्र अनुमोदन लिया जाएगा।
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पौड़ी, नैनीताल में होगी आज फाइनल भिड़ंत

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श्रीनगर गढ़वाल: 12वीं राज्य विद्यालयी महिला क्रिकेट के फाइनल में गुरुवार को श्रीनगर के जीआइटीआइ मैदान में पौड़ी और नैनीताल की भिड़ंत होगी। देहरादून ने तीन अंकों के साथ इस प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया। नैनीताल गत वर्ष की विजेता है, जबकि पौड़ी ने दूसरी बार फाइनल में प्रवेश किया है। लीग के तीनों मैच हारकर अल्मोड़ा प्रतियोगिता से बाहर हो चुका है।
लीग आधार पर खेली जा रही इस प्रतियोगिता में बुधवार को चार मैच हुए। पहले मैच में नैनीताल ने पौड़ी को आठ विकेट से हराया। पौड़ी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए छह विकेट के नुकसान पर निर्धारित 15 ओवरों में 82 रन बनाए। पौड़ी की सुरुचि ने 26 और कप्तान भागवंती ने आठ रन बनाए। नैनीताल की गेंदबाज प्रियंका, आरती, खस्टी ने एक-एक विकेट लिए। पौड़ी के जवाब में नैनीताल की बल्लेबाज कविता जीना ने 13 और दीपिका कांडपाल ने नाबाद दस रन बनाए। पौड़ी की आशा ने तीन विकेट और भागवंती मनीषा ने दो-दो विकेट लिए। दूसरे मैच में देहरादून ने अल्मोड़ा को 43 रनों से हराया। देहरादून की बल्लेबाजों ने 15 ओवरों में 129 रन बनाए, जिनमें 46 अतिरिक्त के रूप में मिले। दून की बल्लेबाज अंजली ने नाबाद 37 और ममता ने 12 रन बनाए। देहरादून की गेंदबाज ऋषिका ने हैट्रिक कर तीन विकेट और शीतल ने दो विकेट लिए। जवाब में अल्मोड़ा के बल्लेबाज मोनिका ने 16 और किरन ने 10 रन बनाए। अल्मोड़ा को भी 44 अतिरिक्त रन मिले। तीसरे मैच में पौड़ी ने अल्मोड़ा को आठ विकेट से हराया। अल्मोड़ा की बल्लेबाज भावना ने 29, बबली के 23 रनों के साथ अल्मोड़ा ने कुल 100 रन बनाए। पौड़ी की गेंदबाज आशा और कांति ने दो-दो, भागवंती ने एक विकेट लिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए पौड़ी की बल्लेबाज और कप्तान भागवंती ने सात चौकों के साथ नाबाद 33 रन और आशा ने 31 रन बनाए। 11.2 ओवरों में ही पौड़ी ने जीत हासिल कर ली। चौथे मैच में नैनीताल ने देहरादून को छह विकेट से हराया।
प्रतियोगिता में नैनीताल नौ अंक और पौड़ी छह अंक प्राप्त कर फाइनल में पहुंचे। खंड शिक्षा अधिकारी माधूलाल आर्य, कृपाल सिंह पटवाल, सावित्री शाह, जयकृत भंडारी, बलराज गुसांई, दीवान रावत, रामेश्वर रावत, महेन्द्र पुंडीर, गजपाल नेगी, दुर्गेश बत्र्वाल, सोनिका पुरी, ज्योत्सना रावत और मुकेश कुमार ने मैच आयोजन में विशेष सहयोग दिया।
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ऑल इंडिया राजीव गांधी बैडमिंटन का गोल्ड ब्वॉय बना चिराग

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अल्मोड़ा: बैडमिंटन के क्षेत्र में लगातार एक के बाद एक सफलता के सोपान पार करते हुए अल्मोड़ा के चिराग सेन ने एक और सफलता का अध्याय जोड़ दिया है। दिल्ली में चिराग सेन ऑल इंडिया राजीव गांधी अंडर-19 गोल्ड कप का विजेता बन गया है। चिराग के भाई लक्ष्य ने भी इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया है। दोनों भाइयों की सफलता से गृह नगर में खुशी का माहौल है। इसी क्रम में बालिका वर्ग में नैनीताल की कुहू गर्ग ने कांस्य पदक हासिल किया।
बैडमिंटन कोच डीके सेन ने दूरभाष पर बताया कि चिराग ने गुजरात के एड्रिन जार्ज को 22-20, 21-16 से पराजित कर राजीव गांधी गोल्ड कप हासिल किया। गोल्ड कप के साथ चिराग को 31 हजार की नकद धनराशि प्रदान की गई। लक्ष्य का मुकाबला गुजरात के एड्रिन जार्ज से हुए सेमीफाइनल में 21-13,21-12 से पराजित हुए। कुहू गर्ग का सेमीफाइनल मुकाबला एकता कालिया से हुआ। जिसमें 21-16, 22-20 से पराजित होकर कांस्य पदक मिला। दोनों को पदक के साथ 11-11 हजार की नकद धनराशि दी गई। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर विधायक मनोज तिवारी, बैडमिंटन संघ उत्तराखंड के महासचिव बीएस मनकोटी, डीम अक्षत गुप्ता, एडीएम प्रशांत कुमार आर्या, एसपी सुनील मीणा, राशिका सिद्दीकी, राम अवतार, प्रशांत जोशी, शेखर लखचौरा, राकेश जायसवाल, सुनील अग्रवाल, सीएल सेन, गोकुल मेहता, संजय नज्जौन, हरीश भंडारी, अमरनाथ रजवार आदि ने प्रसन्नता जताई।
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अल्मोड़ा अर्बन बैंक को 12 नई शाखाएं खोलने की अनुमति

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अल्मोड़ा: सहकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे अल्मोड़ा अर्बन को-आपरेटिव बैंक को रिजर्व बैंक ने प्रदेश में 12 नई शाखाएं खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में आरटीजीएस और एनईएफटी सुविधा प्रदान करने वाला यह पहला बैंक बन गया है।
वर्ष 1991 में सहकारिता की अवधारणा से शुरू इस बैंक की कार्यप्रणाली व सेवाओं को देखते हुए आरबीआई उन चुनिंदा बैंकों में सम्मिलित किया है जो अपने ग्राहकों को देश के 95 हजार आरटीजीएस व एनईएफटी सुविधा युक्त बैंक से अपने धन का हस्तांतरण की सुविधा प्रदान कर सकेगा। बैंक के सचिव पीसी तिवारी ने बताया कि अब तक प्रदेश में बैंक की 38 शाखाएं ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे रही हैं। जबकि वार्षिक कार्ययोजना के तहत वर्ष 2012-13 में 12 नई शाखाएं खोले जाने की स्वीकृति के बाद वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक कुल बैंको की संख्या 50 हो जाएगी। इसके लिए देहरादून, डोईवाला, हर्बटपुर, श्रीनगर, पौड़ी, रूड़की, मुनि की रेती, हरिद्वार, गदरपुर, अल्मोड़ा में एक-एक और हल्द्वानी में दो शाखाएं और खोले जाने का निर्णय लिया गया है।
तिवारी ने बताया कि 6 सौ से अधिक कर्मचारियों वाले अल्मोड़ा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का व्यवसाय ढाई हजार करोड़ से अधिक हो गया है, जबकि छमाही लाभ का आंकड़ा 26 करोड़ का आंकड़ा पार गया है। उन्होंने ग्राहकों की दी जानी वाली सुविधाओं व योजनाओं के लिए अपनी प्रतिबद्घता भी दोहराई है।
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