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Tuesday, September 15, 2009

नैनीताल के फांसी गधेरे में लटकाए थे अनाम स्वतंत्रता सेनानी




पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 में गदर का नाम देकर अंग्रेजों ने कई अनाम स्वतंत्रता सेनानियों को नैनीताल में फांसी पर लटका दिया था। जो ऐतिहासिक अभिलेखों में फांसी गधेरे के नाम से दर्ज है। अभिलेखों में कुमाऊं में पहले स्वतंत्रता संग्राम के बाद संघर्ष में नैनीताल के फांसी गधेरे में अनाम स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देने का उल्लेख है। साथ ही हल्द्वानी में दो बार कब्जा करने व अंग्रेजों के मैदानी क्षेत्र से जान बचाकर नैनीताल आने का भी उल्लेख स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है।

प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा 1857 के संघर्ष की 150 वीं वर्षगांठ में जगह-जगह स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया गया। संस्कृति विभाग के अभिलेखागार की प्रदर्शनी में नैनीताल के फांसी गधेरे में अनाम स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी में लटकाने को लेकर अभिलेख में कहा है कि 1857 के प्रथम आजादी के संघर्ष के दौरान जब कमिश्रन्र रामजे ने उत्तर भारत का चार्ज लिया। तब स्वतंत्रता संघर्ष चरम पर था। 17 सितंबर को एक हजार लोगों ने हल्द्वानी में कब्जा कर लिया था। अंग्रेज तक मैदानों से भागकर नैनीताल आए। 18 सितंबर को मैक्सवेल ने हल्द्वानी में कब्जा किए लोगों को हराया। 16 अक्टूबर को पुन: हल्द्वानी में कब्जा कर लिया। बाद में अंग्रेजों ने छापे मारे। जेल से कैदियों को छुड़ाकर रामजे ने कैदियों से कुली बेगार का काम लिया। इस बीच कालाढूंगी में डाकुओं से संघर्ष हुआ। फांसी गधेरे में स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी पर लटकाए जाने का उल्लेख है।


इसके अलावा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 14 जून से 4 जुलाई 1929 तक कुमाऊं की पहली यात्रा को लेकर भी प्रदर्शनी में पुराने फोटो व अन्य सामग्री में 14 जून को नैनीताल, 15 को भवाली, 16 को ताड़ीखेत, 18 को अल्मोड़ा, 21 को कौसानी, 4 जुलाई को काशीपुर पहुंचने व कुमाऊं की दूसरी यात्रा में 18 से 23 मई 1931 तक के भ्रमण का उल्लेख है। इसमें ताकुला में 14 जून 1929 को छोटी सभा व स्व. गोविंद लाल साह के यहां चार दिन ठहरने व 1913 में लाला लाजपत राय के सुनकिया गांव में आगमन, नैनीताल का प्रसिद्ध झंडा सत्याग्रह का उल्लेख है। इसके अलावा लाला लाजपत राय का कुमाऊँ के क्रांतिकारियों को भेजा पत्र प्रमुख है। जिसमें 4 फरवरी 23 को लिखे पत्र में कहा है कि उन्होंने जो कार्य किया है। उनको हमदर्दी है। मेरी मदद की जरुरत हो तो आप मुझे लिखना। इसके अलावा अनेक पुराने ऐतिहासिक चित्रों व अभिलेखों से स्वतंत्रता आंदोलन में कुमाऊं का योगदान स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है।

Monday, September 14, 2009

*******कुंवर बर्तवाल जी की पुण्य तिथि पर श्रधा सुमन******

*******कुंवर बर्तवाल जी की पुण्य तिथि पर श्रधा सुमन******

चन्द्रकुंवर बर्तवाल

(20 अगस्त 1919- 14 सितम्बर 1947 ई.)

चन्द्रकुंवर बर्त्वाल का जन्म चमोली, गढवाल के मालकोटी ग्राम में हुआ। बचपन प्रकति की रम्य गोद में व्यतीत हुआ। उच्च शिक्षा देहरादून तथा प्रयाग विश्वविद्यालय में हुई, किंतु स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण गांव लौट गए। वहीं अल्पायु में इनका स्वर्गवास हो गया। बर्त्वाल की कविताओं की प्रमुख विशेषता प्रकृति के साथ तादात्म्य, गहन सौंदर्य-बोध तथा कोमलता है। 1981 में इनकी रचना 'बर्त्वाल की कविताएं (तीन खण्डों में) प्रकाशित हुई।

मेघ कृपा
जिन पर मेघों के नयन गिरे
वे सबके सब हो गए हरे।

पतझड का सुन कर करुण रुदन
जिसने उतार दे दिए वसन
उस पर निकले किशोर किसलय
कलियां निकलीं, निकला यौवन।

जिन पर वसंत की पवन चली
वे सबकी सब खिल गई कली।

सह स्वयं ज्येष्ठ की तीव्र तपन
जिसने अपने छायाश्रित जन
के लिए बनाई मधुर मही
लख उसे भरे नभ के लोचन।

लख जिन्हें गगन के नयन भरे
वे सबके सब हो गए हरे।

स्वर्ग सरि

स्वर्ग सरि मंदाकिनी, है स्वर्ग सरि मंदाकिनी
मुझको डुबा निज काव्य में, हे स्वर्ग सरि मंदाकिनी।

गौरी-पिता-पद नि:सृते, हे प्रेम-वारि-तरंगिते
हे गीत-मुखरे, शुचि स्मिते, कल्याणि भीम मनोहरे।
हे गुहा-वासिनि योगिनी, हे कलुष-तट-तरु नाशिनी
मुजको डुबा निज काव्य में, हे स्वर्ग सरि मंदाकिनी।

मैं बैठ कर नवनीत कोमल फेन पर शशि बिम्ब-सा
अंकित करूंगा जननि तेरे अंक पर सुर-धनु सदा।
लहरें जहां ले जाएंगी, मैं जाउंगा जल बिंदु-सा
पीछे न देखूंगा कभी, आगे बढूंगा मैं सदा।
हे तट-मृदंगोत्ताल ध्वनिते, लहर-वीणा-वादिनी
मुझको डुबा निज काव्य में, हे स्वर्ग सरि मंदाकिनी।

प्रकाश हास

किस प्रकाश का हास तुम्हारे मुख पर छाया
तरुण तपस्वी तुमने किसका दर्शन पाया?
सुख-दुख में हंसना ही किसने तुम्हे सिखाया
किसने छूकर तुम्हें स्वच्छ निष्पाप बनाया?
फैला चारों ओर तुम्हारे घन सूनापन
सूने पर्वत चारों ओर खडे, सूने घन।
विचर रहे सूने नभ में, पर तुम हंस-हंस कर
जाने किससे सदा बोलते अपने भीतर?
उमड रहा गिरि-गिरि से प्रबल वेग से झर-झर
वह आनंद तुम्हारा करता शब्द मनोहर।
करता ध्वनित घाटियों को, धरती को उर्वर
करता स्वर्ग धरा को निज चरणों से छूकर।
तुमने कहां हृदय-हृदय में सुधा स्रोत वह पाया
किस प्रकाश का हास तुम्हारे मुख पर छाया?

Monday, September 7, 2009

देहरादून। चंडीगढ़ में हुई राष्ट्रीय इंटर जोन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्तराखंड ने अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार करते हुए तीन गोल्ड सहित 11 पदक कब्जाए। पिछली बार सूबे को दो गोल्ड सहित पांच पदक ही मिले थे। इस बार भी महिला वर्ग में खास सफलता नहीं मिल पाई है।

प्रतियोगिता में जहां महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल के एथलीटों का दबदबा रहा, वहीं सूबे के एथलीटों ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया। प्रमोद पाटनी ने 5000 मीटर दौड़, कुलदीप चौहान ने 3000 मीटर और जितेंद्र पाल ने 100 मीटर दौड़ में सूबे को स्वर्ण पदक दिलाए। इसके अलावा अन्य एथलीटों ने विभिन्न स्पर्धाओं में आठ रजत व कांस्य पदक भी हासिल किए। हालांकि, महिला वर्ग में एक भी पदक हाथ नहीं लगा। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में सूबे के एथलीट अपना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर चंडीगढ़ में भी साफ देखा गया। सिंथेटिक ट्रैक पर हुई राष्ट्रीय इंटर जोन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कई वर्गाें में यहां के एथलीटों के पिछड़ने के पीछे भी यही वजह रही। खासकर महिला वर्ग में जिसमें एक भी मेडल सूबे की झोली में नहीं आ पाया। राष्ट्रीय स्तर पर लंबी-मध्यम दूरी की स्पर्धाओं में जहां सूबे के एथलीट अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं अन्य स्पर्धाओं में पिछड़ते जा रहे है। इसका मुख्य कारण मूलभूत सुविधाओं का टोटा। राज्य बनने के बाद भी अभी तक यहां सिंथेटिक ट्रेक का अभाव एथलीटों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। हालांकि, खेल विभाग जल्द ही सिंथेटिक ट्रेक की बात कह रहा है, लेकिन यह कब तक संभव हो पाएगा, इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है। राज्य एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव संदीप शर्मा का कहना है कि सूबे के एथलीटों में राष्ट्रीय स्तर पर छाने की कुव्वत है, मगर जब तक उच्च स्तरीय सुविधाएं नहीं मुहैया कराई जाएंगी, तब तक खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निखार आना संभव नहीं है।


Sunday, September 6, 2009

विकासनगर (देहरादून)। कभी उत्तराखंड का गौरव समझा जाने वाला एशिया का सबसे ऊंचा चीड़ महावृक्ष अब सिर्फ इतिहास का हिस्सा मात्र रह गया है। 220 वर्षो तक हर तरह के मौसमी झंझावत झेले, लेकिन 8 मई 2007 को आयी तेज आंधी तूफान में अपने ऊंचे अस्तित्व को बचाए रखने में नाकाम चीड़ महावृक्ष अब सिर्फ डाटों के रूप में हमेशा के लिए अपनी याद छोड़ गया है।

टौंस वन प्रभाग पुरोला के देवता रेंज के भासला कंपार्टमेंट खूनीगाड़ में स्थित चीड़ महावृक्ष की लंबाई पर उत्तराखंड के लोगों को नाज था। बेहतर पालन पोषण में पल-बढ़ रहे चीड़ महावृक्ष को पूरे एशिया महाद्वीप में सबसे ऊंचे पेड़ का गौरव हासिल था। हनोल से पांच किमी. दूर स्थित देवता रेंज में चीड़ महावृक्ष की लंबाई 60.65 मीटर और गोलाई 2.70 मीटर थी। इस महावृक्ष की विशेषज्ञता यह थी कि इसमें मुख्य तने से लेकर ऊपर तक कोई शाखाएं नहीं थी, सिर्फ शीर्ष में कुछ शाखाओं का झुरमुट था, जिसके कारण इसकी सुंदरता देखते ही बनती थी। चीड़ महावृक्ष की लंबाई के चर्चे दूर-दूर तक पहुंचे तो वर्ष 1997 में भारत सरकार के वन व पर्यावरण मंत्रालय ने इस चीड़ वृक्ष को एशिया महाद्वीप का सबसे लंबा महावृक्ष घोषित किया। जब इस वृक्ष ने यह गौरव हासिल किया, तब इसकी आयु 220 वर्ष के करीब हो चुकी थी। गैनोडर्मा एप्लेनेटस नामक रोग ने अपना प्रकोप इस कदर फैलाया कि महावृक्ष को अंदर ही अंदर खोखला कर गया, हालांकि गिरने से कुछ समय पहले आईएफआरआई के वैज्ञानिकों ने महावृक्ष के रोग मुक्त होने की पुष्टि की थी। एक तरफ अच्छी खासी आयु और उसमें महावृक्ष की ताकत कम होने लगी और आठ मई 2007 में आए आंधी तूफान का सामना करने की ताकत भी नहीं बची, लिहाजा तीन टुकड़ों में टूटकर चीड़ महावृक्ष इतिहास का हिस्सा बन गया। इसकी यादें बरकरार रखने के लिए विभाग ने महावृक्ष के तने को काटकर उसकी 22 डाटें बनाई। जिन्हें आज भी संग्रहालय के रूप में उसी स्थान पर संरक्षित रखा गया है, जहां कभी महावृक्ष अपनी लंबाई और सुंदरता के साथ तन कर खड़ा था। वैज्ञानिकों द्वारा समय-समय पर इन डाटों को मोनो क्रोटाफास नामक औषधि से उपचारित किया जाता है, ताकि डाट सुरक्षित और संरक्षित रह सके।


देहरादून। अस्थायी राजधानी में नया सचिवालय, नया राजभवन और नए मुख्यमंत्री आवास व सचिव आवास के साथ ही अफसरों के लिए नया क्लब बनाया जा रहा है तो सुविधाजनक स्थान पर नया विधानसभा भवन बनाने से क्यों पीछे हटा जा रहा है। यदि सवाल अस्थायी राजधानी के मानकों का है तो इसे केवल विधानसभा भवन पर ही क्यों लागू किया जा रहा है।

जी हां, विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर की ओर से मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक को भेजे गए एक पत्र का लब्बोलुआब यही है। श्री कपूर ने नए विधानसभा भवन निर्माण की आवश्यकता को विस्तार से बताते हुए अनेक सवाल भी उठाए हैं। पत्र में कहा गया है कि सरकार के स्तर से नए विधानसभा भवन निर्माण की उपेक्षा की जा रही है। अस्थायी राजधानी का हवाला देकर इस अहम मसले को हाशिए पर खिसकाया जा रहा है। मानकों से इतर नए निर्माण हो रहे हैं। राजभवन, सीएम आवास व सचिव आवास समेत विभिन्न जरूरतों को देखते हुए अनेक नए निर्माण हो रहे हैं। यहां तक कि अफसरों के लिए क्लब के निर्माण की दिशा में भी पहल की जा रही है, जबकि यह बहुत आवश्यक प्रतीत नहीं होता है। इसके बावजूद राज्य के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण नए विधानसभा भवन के निर्माण को नजरअंदाज किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि सरकार दूरगामी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए विधानसभा भवन के लिए ऐसा स्थल चिन्हित करे, जो हर दृष्टि से सुविधाजनक हो। वर्तमान विधानसभा भवन जरूरतों को पूरा करने लायक नहीं है। स्टाफ समेत समितियों को काम करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। स्थानाभाव से अभी तक विधानसभा के अफसरों व कर्मियों के ढांचे को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। अधिकतर मौकों पर विधानसभा में धरना-प्रदर्शनों के चलते हरिद्वार मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति रहती है। इससे आम लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। मौजूदा विधानसभा भवन में मंत्रियों के कार्यालय हैं, जबकि सचिवालय इससे कई किलोमीटर दूर है। अब राजधानी चयन आयोग की रिपोर्ट भी सरकार को मिल चुकी है और उसे सार्वजनिक भी किया गया है। रिपोर्ट में भी कई नए बिंदुओं की तरफ ध्यान इंगित किया गया है। एक अहम बिंदु यह भी है कि अस्थायी राजधानी के मानक के नाम पर नए विधानसभा भवन के निर्माण पर पेच फंसा है। इन मानकों को नजरअंदाज कर जब जरूरत के आधार पर अन्य निर्माण हो सकते हैं तो विधानसभा के नए भवन निर्माण को प्रभावी पहल होनी चाहिए। वर्तमान में यह राज्य की बड़ी जरूरतों में से एक है

देहरादून। मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने काशीपुर में महुआखेड़ा गंज औद्योगिक क्षेत्र में बिजलीघर का निर्माण कार्य जल्द करने के निर्देश दिए। काशीपुर से आए भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि महुआखेड़ा में बिजलीघर नहीं बनने से उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने काशीपुर में बाजपुर रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज बनाने और केंद्र से प्रस्तावित आईआईएम की स्थापना की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योगों को सुविधाएं मुहैया कराने को वचनबद्ध है। औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर समुचित कार्यवाही का भरोसा दिलाया। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के निर्माण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राम मेहरोत्रा, जेएस नरूला, आनंद वैश्य, गिरीशचंद्र तिवारी, ईश्वरचंद्र गुप्ता, चौ. अनिल कुमार सिंह शामिल थे।


Wednesday, August 12, 2009

सभी प्रकार की ख़बर दैनिक जागरण से साभार

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-जयराम रमेश ने निशंक को दिलाया भरोसा

देहरादून। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक को राज्य की समस्याओं के निराकरण में सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया है।

बीजापुर गेस्ट हाउस में राज्यमंत्री ने सीएम से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच राज्य से जुड़े विभिन्न मसलों पर बातचीत हुई। डा. निशंक ने कहा कि राज्य को वन संरक्षण की एवज में विशेष सहायता दी जानी चाहिए। वन एवं पर्यावरण के मद में केंद्र स्तर पर लंबित 771 करोड़ की धनराशि तुरंत अवमुक्त होनी चाहिए। वन अधिनियम से संबंधित मामलों के निस्तारण को लखनऊ स्थित कार्यालय को देहरादून स्थानांतरित किया जाए। इसके साथ ही बीस हेक्टेयर तक के मामले सरकार को अपने स्तर पर निस्तारित करने का अधिकार मिले। गढ़वाल व कुमाऊं को जोड़ने वाले हरिद्वार-कोटद्वार-रामनगर मार्ग को स्वीकृत कराने में केंद्र सार्थक पहल करे। हरिद्वार में हिल बाईपास से मोतीचूर तक सड़क निर्माण को जल्द स्वीकृति दी जाए। उन्होंने कहा कि कैंपा के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा केंद्र को भेजे 595 करोड़ के प्रस्ताव पर भी स्वीकृति प्रदान की जाए। सीएम ने वन अधिनियम से स्वीकृति प्रक्रिया का सरलीकरण करने का भी अनुरोध किया। केंद्रीय राज्यमंत्री जयराम रमेश ने सीएम को बताया कि राज्य को 106 करोड़ की धनराशि तत्काल दी जा रही है। इसमें कैंपा के अंतर्गत 84 करोड़ भी हैं। वन क्षेत्र वाले राज्यों को वित्तीय सहायता देने के लिए 13वें वित्त आयोग अध्यक्ष से वार्ता हुई है और इस मामले में आयोग की संस्तुतियों के बाद ही विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार राजाजी पार्क को सुरक्षित रखने के लिए देहरादून-मोहंड हाइवे पर एक टनल का निर्माण करने का प्रस्ताव तैयार करने जा रही है। हरिद्वार-कोटद्वार-रामनगर मोटर मार्ग का सर्वे वाइल्ड लाइफ इस्टीट्यूट अगले दो माह में पूरा कर लेगा। कार्बेट नेशनल पार्क में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कार्बेट में माइक्रोलाइट एयर क्राफ्ट योजना भी शुरू की जाएगी। राज्य सरकार कार्बेट-लैंसडाउन-राजाजी पार्क के पश्चिमी क्षेत्र के कारिडोर के लिए योजना तैयार कर सकती है। उन्होंने कहा कि गंगा रिवर बेसिन परियोजना का लाभ उत्तराखंड को भी मिलेगा। हिमालयन ग्लेशियर पर अध्ययन के लिए वाडिया इस्टीट्यूट में एक सेंटर भी खोला गया है। उन्होंने लखनऊ के नोडल कार्यालय को देहरादून स्थानांतरित करने के लिए भी आश्वस्त किया। इस मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव विजय शर्मा, महानिदेशक डा. दिलीप कुमार, अतिरिक्त महानिदेशक डा. गंगोपाध्याय, प्रदेश के मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे, सचिव वन अनूप बधावन, सचिव लोनिवि उत्पल कुमार सिंह तथा प्रमुख वन संरक्षक आरएसबीएस रावत भी मौजूद थे।

2050 तक विकसित देशों के समान होगी प्रति व्यक्ति आय

देहरादून। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा देश जिस गति से प्रगति कर रहा है, उसके मुताबिक 2050 तक देश में प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों के बराबर हो जाएगी।

वह भारतीय वनसेवा के 2007-09 के लिए आयोजित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के व्यावसायिक वानिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के 38वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री जयराम रमेश ने कहा कि भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा गांवों में रहता है। जलवायु परिवर्तन ग्रामीणों पर सीधा असर डाल रहा है। ऐसे में वन आधिकारियों का दायित्व बहुत बढ़ जाता है। समारोह को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव विजय शर्मा, वन महानिदेशक व भारत सरकार के विशेष सचिव डॉ. पीजे दिलीप कुमार ने भी संबोधित किया। इस मौके पर इंडियाज फॉरेस्ट एं़ड ट्री कवर कंट्रीब्यूशन एज ए कार्बन सिंक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इसके पहले आईजीएनएफए के निदेशक आरडी जकाती ने अकादमी की रिपोर्ट पेश की। इस मौके पर प्रदेश के मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे, आईसीएफआरई के महानिदेशक जगदीश किशवान, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत, एफआरआई के निदेशक डॉ. एसएस नेगी, आदि मौजूद रहे।

विश्वेश कुमार टॉपर

देहरादून: भारतीय वन सेवा के 2007-09 बैच में छत्तीसगढ़ काडर के विश्वेश कुमार ने 80.9 प्रतिशत अंक पाकर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। उन्होंने दस पुरस्कारों पर कब्जा जमाया। मुख्य अतिथि मोंटेक सिंह अहलूवालिया व कार्यक्रम अध्यक्ष वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश ने उन्हें सम्मानित किया।

राज्य वन सेवा महाविद्यालय

का नया नाम सीएएसएफएस

देहरादून: एफआरआई परिसर में स्थित राज्य वन सेवा महाविद्यालय का नाम बदल गया है। अब इसे सेंट्रल एकेडमी फॉर स्टेट फॉरेस्ट सर्विसेज के नाम से जाना जाएगा।

सिविल सेवा की तर्ज पर गठित होगा वन सेवा का ढांचा

देहरादून, जागरण संवाददाता: भारतीय वन सेवा का ढांचा भारतीय प्रशासनिक सेवा की तर्ज पर गठित होगा। इतना ही नहीं कोई भी वन अधिकारी अपना काडर नहीं बदल सकेगा।

सोमवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के 38वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के दौरान केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्रीजय राम रमेश ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र भारतीय वन सेवा का आधुनिकीकरण करने की तैयारी की जा रही है, ताकि उसे भी भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की तरह ही आकर्षक बनाया जा सके। जयराम रमेश ने कहा कि देश में पहली बार बजट में वन एवं पर्यावरण क्षेत्र में काम के लिए भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद आईसीएफआरई को 100 करोड़ रु. प्रदान किए गए हैं। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण एवं भारतीय जंतु सर्वेक्षण के 15-15 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। कैंपा फंड को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है। जिसके तहत कुल 11 हजार करोड़ रु. में से 871 करोड़ उत्तराखंड को मिलेंगे।

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