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Wednesday, June 22, 2011

पूरा नहीं हो पाया भू-बैकुंठ धाम में हरियाली का सपना

पहाड़ी इलाको में नष्ट हो रही प्राकर्तिक सुन्दरता को बचाने के लिए वर्ष 2002 में शुरू हुए  भू-बैकुंठ धाम की खाली चोटियों को हरा-भरा करने की योजना विफल होती नज़र आ रही है।  भू-बैकुंठ धाम की खाली चोटियों को हरा-भरा करने व एकता वन में आने वाले प्रत्येक यात्री को यात्रा को यादगार बनाने और अपने बुजुर्गो की स्मृति में पौधे रोपने की योजना को सरकारी विभाग ही पलीता लगा रहे हैं।
भू-बैकुंठ धाम की खाली चोटियों को हरा-भरा करने के लिए श्री बदरीनाथ धाम में वन विभाग ने बद्रीश एकता वन की शुरूआत की थी। इस योजना के तहत वन विभाग ने देवदर्शिनी के पास बामणी में नौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में देश के अलग-अलग प्रदेशों से आने वाले यात्रियों के लिए भूखंड चिन्हित करने के साथ ही आरक्षित किये थे। यात्री को अपने प्रदेश के लिए आवंटित भूखंड में ही अपनी यात्रा और पूर्वजों के नाम से पौधरोपण करना था। इसके लिए यात्री को 100 रुपया शुल्क देने के साथ पौधे पर यात्री के नाम व पते की तख्ती लगनी थी। जब यह योजना शुरू हुई तो यात्रियों ने भी इसे हाथों हाथ लिया और देखते ही देखते बद्रीश एकता वन में सैकड़ों पौध रोपित हो गये। पौध रोपण के लिए न केवल मंदिर समिति बल्कि यहां के होटल, धर्मशालाओं में हर यात्री को इसके प्रति जागरूक किया जाता रहा, लेकिन दो वर्ष बाद ही वन विभाग की यह योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई। वर्ष 2005 में बर्फ से सड़क के किनारे बनाया गया बुकिंग काउंटर भी ध्वस्त हो गया और इसी के साथ इस महत्वाकांक्षी योजना खानापूर्ति बनकर रह गई। अब हालात यह है कि करीब छह वर्षो से बद्रीश एकता वन की यह योजना मात्र कागजों में ही चल रही है।
'बद्रीश एकता वन निश्चित ही बदरीनाथ को हरा-भरा करने के लिए एक सराहनीय प्रयास था। वर्तमान में इस वन में पौधरोपण को लेकर वह उत्साह नहीं है जो शुरूआती दौर में रहा। अब इसे फिर से  हरित करने विकसित करने का प्रयास  किया जा रहा है।

भगीरथ के इंतजार में धराली

उत्तराखंड राज्य में वैसे तो कई ऐसे स्थल हैं जो पर्यटन की दृष्टी से बहुत सुन्दर हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाएं न  होने  के कारण ये स्थान अपनी खूबसूरती का फायदा  नहीं उठा पाते।  ऐसा ही कुछ हाल है   गंगोत्री धाम यात्रा मार्ग पर स्थित धराली ग्राम  का।  गांव में सुविधाएं न होने से पर्यटक चाहकर भी इस रमणीक स्थल पर नहीं ठहरते पाते।  ग्रामीणों का कहना है कि धराली ग्राम को उस 'भगीरथ' का इंतजार है, जो इस गांव को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करा सके। 
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 75 किमी दूर गंगोत्री राजमार्ग पर धराली गांव पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। गांव में खुदाई में निकला प्राचीन कल्प केदार मंदिर, मार्कंडेय मंदिर और सेब के बाग आकर्षण का केंद्र हैं। श्रीकंठ पर्वत की तलहटी में बसे इस गांव से सात ताल का ट्रैक सहित अन्य उच्च हिमालयी ट्रैक शुरू होते हैं। संभावनाओं के चलते ही धराली में दो दर्जन होटल व गेस्ट हाउस तैयार हो गये हैं। गंगोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले देशी विदेशी श्रद्धालु व पर्यटक इस जगह पर रुकना भी पसंद करते हैं, लेकिन सुविधाएं न मिलने पर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पर्यटन के लिहाज से जरूरी सुविधाओं में शामिल विद्युत, संचार व सफाई की व्यवस्थाएं नहीं जुटाई जा सकी है। सार्वजनिक शौचालय, कूड़ेदान, ड्रेनेज जैसी सुविधाएं कोसों दूर हैं। वहीं वाहन पार्किंग, साइनबोर्ड और पर्यटन सूचना केंद्र जैसी व्यवस्था भी नहीं है। यात्रा सीजन की शुरुआत में व्यवस्थाएं चाक चौबंद तो की जाती हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में सारी व्यवस्था  चरमरा जाती हैं। धराली की ग्राम प्रधान ममता पंवार ने बताया कि जिला पंचायत सहित शासन प्रशासन से अनेक बार जरूरी सुविधाएं जुटाए जाने की मांग की गयी  है, लेकिन अभी तक स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।

उम्मीद की किरन, गंगोत्री मेगा प्रोजेक्ट 

 धराली के लोगों को निर्मल गंगोत्री मेगा प्रोजेक्ट से काफी उम्मीदें हैं। इसके तहत हर्षिल से गंगोत्री तक पर्यटकीय सुविधाओं का विस्तार किया जाना है।
'धराली पर्यटकों की पसंदीदा जगह रही है। निर्मल गंगोत्री प्रोजेक्ट से धराली को काफी लाभ मिलेगा। लेकिन यह सब तभी संभव होगा,  जब ये प्रोजेक्ट पूरी तरह से बन कर तैयार हो जायेगा।

पंचायत एक्ट को लागू करने को लेकर ग्राम प्रधानों का धरना प्रदर्शन

गाँव में पंचायत एक्ट लागू  करने को लेकर सहसपुर विकासखंड के ग्राम प्रधानों ने कार्यालय में तालाबंदी और धरना शुरू कर दिया है। सहसपुर ब्लॉक के ग्राम प्रधान मंगलवार को सुबह करीब साढ़े दस बजे ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष मेघ सिंह के नेतृत्व में विकासखंड कार्यालय में एकत्रित हुए और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रधानों ने ब्लॉक कार्यालय में तालाबंदी करने के पश्चात वहां पर धरना-प्रदर्शन किया। प्रधानों का कहना था कि उत्तराखंड राज्य को बने दस वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक राज्य में उत्तर प्रदेश का ही पंचायतराज एक्ट लागू है। प्रधानों का कहना था कि प्रदेश सरकार अपना पंचायतराज एक्ट लागू करें। 29 विभागों को पंचायतों के अधीन करने की लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक ये विभाग पंचायतों के अधीन नहीं किए गए हैं। प्रधानों का कहना था कि सरकार पंचायतों को सुदृढ़ करने के बजाए उन्हें कमजोर करने में लगी हुई है। इसके अलावा ग्राम प्रधान अपना मानदेय बढ़ाए जाने की भी मांग कर रहे थे। प्रधानों का कहना था कि उन्हें महंगाई के इस दौर में मात्र 600 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। सरकार ने सांसदों, विधायकों, अधिकारियों, कर्मचारियों सभी का वेतन बढ़ा दिया है, लेकिन प्रधानों की कोई सुध नहीं ली गई है। प्रधानों ने मानदेय बढ़ाकर पांच हजार रुपये किया जाने की मांग की है ।

Tuesday, June 21, 2011

प्रथम कैलास मानसरोवर यात्रा दल भारत लौटा

पिथौरागढ़। कैलास मानसरोवर का प्रथम दल कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी करने के बाद भारत वापस लौट चुका है। दल के सभी सदस्य सकुशल और प्रसन्नचित्त हैं।
आईटीबीपी 7वीं वाहिनी भातिसीपु के कंट्रोल रुम से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की प्रात: प्रथम कैलास मानसरोवर यात्रा दल कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी कर भारत लौट चुका है। इस मौके पर तीसरे दल ने तिब्बत में प्रवेश किया। कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी कर वापस लौटे प्रथम दल के यात्रियों ने बताया कि उनकी यात्रा पूरी तरह सफल रही। कैलास मानसरोवर का दर्शन उनके जीवन की विशेष उपलब्धि रही। वहीं चौथा कैलास मानसरोवर यात्रा दल आधार शिविर धारचूला से चलकर प्रथम पैदल पड़ाव सिर्खा पहुंच चुका है। यह दल बुधवार को प्रथम पैदल पड़ाव सिर्खा से गाला रवाना होगा। तीसरा दल लिपूलेख पास कर मंगलवार को तिब्बत के तकलाकोट पड़ाव में पहुंचा है। दल बुधवार को तकलाकोट में प्रवास करने के बाद आगे रवाना होगा। दूसरा दल इस समय तिब्बत में मानसरोवर की परिक्रमा कर रहा है।

गोरखाओं ने की 27 प्रतिशत आरक्षण की मांगा

पिछले दिनों गुजर   आरक्षण को लेकर देश में हुए हिंसक आन्दोलन से जहाँ एक ओर देश  में हिंसात्मक  गतिविधिया  हुई,  वही  आम  लोगो  को  भी  काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।   अब खबर है की  गोरखा सुधार सभा ने यूपी की भांति उत्तराखण्ड के गोरखाओं को भी 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की मांग उठाई है। सम्मेलन में समुदाय की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया।
रामलीला मैदान में हुए सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा यूपी में गोरखा समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण की परिधि में शामिल किया गया है, लेकिन उत्तराखंड में आरक्षण का प्रतिशत बहुत कम है। सम्मेलन में समुदाय को उत्तराखंड में भी 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की मांग उठाई गई। प्राइमरी, जूनियर व दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पिछड़े वर्ग का लाभ कम मिलने का मामला भी उठाया गया और मांग की गई कि पूरा लाभ विद्यार्थियों को दिया जाये साथ ही स्पेशल कम्पोनेंट के तहत पिछड़े वर्ग के लिए अलग से बजट की व्यवस्था की जाये। बैठक में वर्तमान में रामलीला मैदान के निकट स्थित किले को गोरखा हितों के उपयोग के इस्तेमाल के लिए इजाजत दिये जाने की मांग सम्मेलन में उठाई गई।
धारचूला से आये भूपेन्द्र सिंह थापा ने फौज में भर्ती हो रहे युवाओं के सम्मुख निकट भविष्य में आने वाली परेशानी का जिक्र करते हुए इसके समाधान की मांग की  है।

ट्रेन चालक की समझदारी से टला गया बड़ा हादसा

बीते सोमवार को हरिद्वार बाइपास रेलवे क्रासिंग पर एक बड़ा हादसा होने बच गया। अगर सही समय पर ट्रेन चालक अपनी  सूझबूझ से काम न लेता तो नाजाने कितने मासूम लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता।   जरा सोचिये शताब्दी एक्सप्रेस अपनी रफ्तार से रेलवे ट्रैक पर दौड़ रही हो और व्यस्ततम ट्रैफिक वाले मार्ग का रेलवे बैरियर खुला हुआ हो। तो.. क्या से क्या हो जाता।  ऐसा ही कुछ हुआ सोमवार को हरिद्वार बाइपास रेलवे क्रासिंग पर। चालक ने बीच रास्ते में ही ट्रेन रोक कर  एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
घटना सोमवार शाम लगभग सवा पांच बजे हरिद्वार बाइपास रेलवे फाटक पर हुई। हुआ यूं कि, शताब्दी एक्सप्रेस दिल्ली जाने के लिए अपने निर्धारित समय पर स्टेशन से चली। जब ट्रेन बाइपास फाटक के नजदीक पहुंची तो ट्रेन चालक ने दूर से भांप लिया कि फाटक खुला हुआ है। यह वो फाटक है जिस पर हर समय वाहनों की रेलमपेल लगी रहती है। चालक ने गेटमैन से संपर्क करना चाहा पर दूसरी ओर से जवाब नहीं मिला। चालक ने इमरजेंसी ब्रेक लगा ट्रेन फाटक से चंद मीटर पहले रोक दी। रेलवे फाटक पर शताब्दी एक्सप्रेस को देखते ही वाहन चालकों के होश उड़ गए। भगदड़ जैसे हालत बन गए।
चालक नीचे उतरा और गेटमैन को देखने गया। वहां का नजारा देखकर वह हतप्रभ रह गया। गेटमैन अपने कक्ष से नदारद था। तलाश हुई तो वह कक्ष की पिछली तरफ नशे में धुत पड़ा था, जबकि वायरलैस सेट जमीन पर गिरा हुआ था। चालक ने तुरंत रेलवे स्टेशन पर अफसरों से संपर्क किया व मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही अफसरों में हड़कंप मच गया। अफसर मौके पर पहुंचे। सूचना पर पुलिस भी वहां आ पहुंची। पुलिस ने आरोपी गेटमैन को अपने कब्जे में ले लिया और मेडिकल को ले गई। इसके बाद फाटक बंद कर शताब्दी एक्सप्रेस को दिल्ली रवाना किया गया। इस दौरान लोगों का यही कहना था कि अगर चालक ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
स्टेशन अधीक्षक एसडी डोबाल ने बताया कि फाटक रेलवे के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ईडब्लूआइ के अंर्तगत आता है। घटना के बाद ही ईडब्लूआइ के अफसर वहां पहुंच गए थे। उन्होंने गेटमैन का मेडिकल कराया व उसे तत्काल सस्पेंड कर दिया। मामले में रेलवे द्वारा जांच बैठा दी गई है।

पिछले दिनों भी हुई थी ऐसी ही घटना, जिसमे ट्रेन को जंगल में रोकना पड़ा था।

 23 मई को बांद्रा एक्सप्रेस अपनी निर्धारित गति से आ रही थी। तभी दून-हरिद्वार हाइवे पर मोहकमपुर फाटक को गेटमैन ने बंद कर दिया। एक रोडवेज चालक ने बैरियर बंद होने से चंद सेंकड पहले बस फाटक में घुसा दी। इस दौरान सामने वाला फाटक बंद हो गया और बस रेलवे ट्रैक पर फंस गई। उस वक्त भी बांद्रा एक्सप्रेस को जंगल में रोकना पड़ा नहीं तो शायद उस दिन भी कोई बड़ा हादसा हो जाता।

मनमाना किराया वसूल रहे चालको से ग्रामीण परेशान

उत्तराखंड के ग्राम  त्यूणी, तहसील क्षेत्र के विभिन्न रूटों पर  छोटे वाहन चालको की मनमानी के चलते वाहन चालक ग्रामीणों  से  मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इससे खफा लोगों ने डीएम को ज्ञापन भेजकर किराया निर्धारण करने की मांग की। ग्रामीणों ने क्षेत्र में संचालित बगैर परमिट के हिमाचल-प्रदेश के छोटे वाहन पर भी रोक लगाने की मांग की।
डीएम को प्रेषित ज्ञापन में क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बसों के अभाव में त्यूणी तहसील क्षेत्र के अधिकांश रूटों पर छोटे वाहनों का संचालन होता है। आरोप है कि ये छोटे वाहन चालक ग्रामीणों से मनमाना किराया वसूलते हैं। लोगों का कहना है कि वाहन चालक त्यूणी से मझोग दूरी चार किमी और त्यूणी से मैंद्रथ दूरी पांच किमी का दस रुपये प्रति सवारी किराया वसूलते हैं, जो कहीं अधिक है। बसों के अभाव में त्यूणी-हनोल-मोरी, त्यूणी-दारागाड़-केराड़, त्यूणी-चिल्हाड़, त्यूणी-कथियान, त्यूणी-आराकोट-हाटकोटी, त्यूणी-अणू-अटाल व त्यूणी-दार्मीगाड़ चार नंबर समेत विभिन्न रूटों पर छोटे वाहनों का संचालन होता है। इसके अलावा यहां पड़ोसी राज्य हिमाचल-प्रदेश के रोहडू क्षेत्र के दर्जनों छोटे वाहनों का संचालन भी होता है। लोगों का कहना है कि हिमाचल के छोटे वाहन राज्य में बगैर परमिट के चल रहे हैं। छोटे वाहन चालकों की मनमानी से लोग परेशान हैं। कई बार शिकायत के बाद भी तहसील प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है। इससे लोगों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने इस संबंध में डीएम सचिन कुर्वे को ज्ञापन भेज जल्द कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

....जल्द बनेगा उत्तराखंड मंगल दल

पूर्व कमांडर त्रिलोकसिंह बोहरा और उमेश्वरसिंह तड़ागी ने  उक्रांद से इस्तीफा देने के बाद युवक व महिला मंगल दलों को साथ लेकर उत्तराखंड मंगल दल बनाने की घोषणा की है । उनका कहना है कि सामाजिक गतिविधियों में बढ़चढ़कर भाग लेने के बाद भी मंगल दलों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
दोनों नेताओं ने बताया कि क्षेत्र की समस्याओं के साथ ही पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के सुनियोजित विकास के लिए संघर्ष किया जाएगा। इस मुहिम में युवक और महिला मंगल दलों को साथ लेकर चलने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में मंगल दलों की अनदेखी की जा रही है। जबकि वह ग्रामीण क्षेत्रों में रचनात्मक कार्यो के अलावा सामाजिक गतिविधियों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। विभिन्न मंगल दलों से जुडे़ युवाओं से उत्तराखंड मंगल दल गठित करने में सहयोग की अपील की गई है।

पक्की सड़को से चमकेंगे गांवों

सड़को की ख़राब हालत से परेशान प्रदेश के कई गांवों में अब जल्द ही सड़के पक्की हो जाएँगी।   जनपद में जिला योजना के तहत विभिन्न मोटर मार्गो को मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार द्वारा कांडा में विश्राम गृह भी स्वीकृत किया है। इसके अलावा चार मोटर मार्गो को भारत सरकार से सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है।
 भारत सरकार से घिंघारतोला से देवली, विजयपुर से रणकांडे व बनलेख से मउडियार व खंतोली तक मोटर मार्गो की स्वीकृति प्रदान की है। जिला योजना से नरगोली से तुसरेड़ा, देवीनगर से तुसरेड़ा, नरगोली से बांस-सेराघाट, बोहाला से हन्योलीपंप, जौलकांडे से शीशाखानी, बोहाला से नदीगांव, रावतसेरा से माणा विमौली, सातचौंरा से जल्थाकोट, गंगनाथ धार से नारायण देव मंदिर, सिमकूना से बाजड़ मोटर मार्ग को मंजूरी प्रदान की है।  इसके अलावा कांडा भाकड़पंत को विस्तार, पालड़ीछीना से जोगाड़ी, दोफाड़ में पुल निर्माण, कांडा से थपलियाधार, घिंघारतोला से देवली, मजबे का विस्तार, कमेड़ीदेवी से झांकरा, दोफाड़ से ओखलधार, अनगड़ी पुल से गापानी, घिंघारतोला से भैरूचोबट्टा, दोफाड़ रताइस मोटर मार्ग को पीएमजीएसवाई में मिलान, भैरू चौबट्ट से गैराड़ मोटर मार्ग को स्वीकृति दी है। इसके अलावा कांडा में विश्राम गृह, लाल पहाड़ से दोया तक सीसीमार्ग, फुसेरा धनागिरी से सुंदिल तक मिलान व बालीघाट धरमघर मोटर मार्ग के खितोली तक मिलान का कार्य स्वीकृत किया है।  शीघ्र ही इन कार्योँ पर सर्वे करने के निर्देश दिए हैं, जिनके परिणाम जल्द ही देखने को मिलेंगे  ।

उत्तराखंड में मानसून की दस्तक

 मानसून के इंतजार में बैठे उत्तराखंड में मानसून  ने दस्तक दे दी है। सोमवार को  कुमाऊं मंडल के कुछ हिस्सों में मानसून का नज़ारा देखने को मिला। पिछले  सात सालों में 2007 व 2008 के बाद उत्तराखंड में यह तीसरा मौका है, जब मानसून का हफ्तेभर पहले आगमन हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि दो-तीन रोज में संपूर्ण उत्तराखंड में मानसून सक्रिय हो जाएगा।
प्री-मानसून जैसे बरस रहा था, उससे यह संभावना जताई जा रही थी कि सूबे में इस बार मानसून जल्दी दस्तक दे देगा। कुछ दिन पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून के आने बाद दो-चार रोज में इसके उत्तराखंड में प्रवेश की संभावना जताई गई थी। सोमवार को कुमाऊं क्षेत्र में मानसून का आगमन भी हो गया।  मौसम का जैसा रुख है उसे देखते हुए उम्मीद है कि दो-तीन रोज में मानसून पूरे उत्तराखंड में सक्रिय हो जाएगा।
गौरतलब है कि इस बार मानसून करीब हफ्तेभर पहले पहुंचा है। सूबे में अमूमन जून के तीसरे हफ्ते में मानसून पहुंचता है, जो इस बार 20 जून को ही पहुंच गया। पिछले सात सालों में यह तीसरा अवसर है, जब मानसून नियत समय से पहले आया है। गत वर्ष तो यह करीब 12 दिन विलंब से पांच जुलाई को आया था।
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