जंगल के साथ ही जल गई कई घरों की खुशियां भी
पौड़ी गढ़वाल। तमाम दावे, वनों को आग से बचाने की सारी कवायदें, पानी की तरह बहाई गई लाखों रुपये की रकम और इस मौसम में आग मुक्त जंगल के सभी वादे धरे के धरे रह गए। देखते ही देखते धुआं उठा और जंगल जलने लगे पर जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं खुली। हाथ पर हाथ बांधे अधिकारी अपनी 'फायर लाइनों' के भरोसे बैठे रहे और आग ने जंगलों के साथ कई घरों की खुशियों को भी जलाकर राख कर दिया। शुक्रवार को पौड़ी में एक ही गांव के पांच लोगों के जंगल की आग में जान गंवाने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली कठघरे में आ गई है। हादसे ने उन 'फायर लाइनों' की उपयोगिता पर भी सवाल उठा दिए हैं, जिनके भरोसे विभाग हर बार खुद अपनी पीठ थपथपाता रहा है। हर साल 14 फरवरी से वन महकमा फायर सीजन का शोर मचाता है। लाखों रुपये पानी की तरह बहाकर जंगलों में जर्मन पैटर्न पर 'फायर लाइन' बनाई जाती हैं। दावे किए जाते हैं कि इससे जंगल में आग एक क्षेत्र विशेष से आगे किसी सूरत में नहीं फैलेगी, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह दावा धुआं हो रहा है। फायर लाइनें आग पर काबू पाने में बिलकुल नाकाम साबित हो रही हैं। ऐसे में इनकी उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। इसके बावजूद महकमा इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा। हर बार बस आग पर काबू की कोशिश की की बात कह अधिकारी समस्या से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं, लेकिन शुक्रवार को हुए हादसे ने महकमे की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठा दिए हैं। शुक्रवार को गगवाड़ा गांव में हुए हादसे ने छह लोगों की जान लेली और सात लोगों को गंभीर रूप से झुलसा दिया। गांव से केवल पांच किलोमीटर दूरी पर कमिश्नरी मुख्यालय और वन महकमे के सिविल सोयम व फारेस्ट विभाग स्थित है, लेकिन फायर लाइन के भरोसे बैठा कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। महकमे की उदासीनता देख ग्रामीणों ने खुद ही आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी इसी कोशिश ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया। यहां सवाल उठ रहा है कि अगर विभाग ने यहां फायर लाइन बनाई थी, तो आग बेकाबू क्यों हो गई और लाइन आग को आगे बढ़ने से क्यों नहीं रोक सकी। और अगर लाइन नहीं बनाई गई थी, तो फिर इस हादसे की जिम्मेदारी किसकी है। हादसे के बाद गगवाड़ा के ग्रामीणों से लेकर पौड़ी तक के लोग इन सवालों के जवाब मांगने लगे हैं। वजह चाहे जो भी रही हो, लेकिन जब घटना के बाबत डीएम समेत वन विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क की कोशिशें की गई, तो सभी के फोन आउट आफ कवरेज चल रहे थे। अपणि-बोली-भाषा का बगैर न त अपणि उन्नति हवै कद और न ही समाज की। जु समाज अपणि-बोली भाषा-अर-रिती-रिवाज से शर्म करदू ऊ वैकू पतन कू सबसे बडू कारण छ। r.p. chamoli |
Saturday, May 2, 2009
Thursday, April 30, 2009
Tuesday, April 21, 2009
News Updates
| खतरे में नैनीताल: दरक सकता है बलिया नाला! -करोड़ों खर्च होने के बाद भी भू-स्खलन का खतरा आशंका: कई गांव की करीब 20 हजार आबादी आ सकती है खतरे की जद में -भाजपा विधायक ने शासन को लिखी चिट्ठी, आशंका जताई हल्द्वानी: बलिया नाला एक बार फिर नैनीताल के लिए खतरा बन गया है। नाले के आसपास पहाड़ों में पड़ी दरारें बढ़ती जा रही हैैं। साथ ही धीमी गति से भू-स्खलन भी हो रहा है। खतरा नजर भले ही न आ रहा हो मगर बरसात के समय तबाही मचा सकता है। भाजपा विधायक ने भी भयावह होती स्थिति से शासन को अवगत करा दिया है। नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध झाील का लुत्फ उठाने देश ही नहीं बल्कि विश्वभर के लोग हर साल और हर समय आते हैैं। इस झाील में पानी संतुलन से अधिक न हो, इसके लिए बलिया नाला निकाला गया है। जो झाील से ब्रेबरी पुल तक है। यह नाला अंग्र्रेजों ने निकाला था। इस नाले में होकर झाील का पानी रानीबाग में आकर गौला नदी में मिलता है। चार साल पहले इस नाले को 15.56 करोड़ के प्रोजेक्ट से तैयार किया गया है। बावजूद इसमें भू-स्खलन की स्थिति बनी रहने से इसकी गुणवत्ता पर उंगलियां उठा रही है। सिंचाई विभाग के सूत्र बताते हैैं कि वीरभट्टी, कृष्णापुर, रहीश होटल का क्षेत्र, राजकीय इंटर कालेज और आलूखेत में पड़ी दरारें अभी तक ज्यों की त्यों हैैं। यह हाल गरमी के समय में है। यह हाल बढ़ती आबादी और आवागमन से बढ़ते बोझा से पैदा हो रही है। स्थिति से भाजपा विधायक खडग़ सिंह बोहरा ने भी शासन को अवगत करा दिया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि बलिया नाला नैनीताल की नींव है। उसमें करोड़ों खर्च के बावजूद भू-स्खलन की स्थिति बनी हुई है। नाले की तली और साइडें वीरभट्टी तक पक्की है। नाले की बुनियाद और उसके दोनों ओर की पहाडिय़ों का भारी कटाव व धसाव अभी भी हो रहा है, जो नैनीताल के लिए कभी खतरा बन सकता है। इस स्थिति को गंभीरता से लिए बिना अगर झाील संरक्षण योजना या फिर जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत कार्य कराये जा रहे हैैं, तो वह सभी कार्य व्यर्थ हैं। इधर, राज्य उद्यमिता विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष डा.रमेश पांडे ने फोन पर बताया कि आधा दर्जन इलाके खतरे में हैैं। इस बाबत तत्कालीन कांग्र्रेस सरकार में उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखकर दिया था, जिसमें उन्होंने रोप-वे की तर्ज पर स्वीडन अथवा और कहीं विदेश के इंजीनियर बुलाकर मजबूती से काम कराने की मांग की गई थी। इंसेट:::::::::शासन ने मांगी डीपीआर हल्द्वानी: सिंचाई विभाग उत्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एबी पाठक भी नाले की कमजोरी स्वीकारते हैैं। उनका कहना है कि झाील से लेकर करीब डेढ़ किमी तक नाले का तल कुछ साल पहले पक्का कर दिया था। बाकी हिस्सा कच्चा है। जहां पहाड़ कमजोर हैैं वहां भू-स्खलन की स्थिति से हालत चिंताजनक हो जाती है। विभाग पूरी नजर रखे हुए है। शासन ने भी बलिया नाले की डीपीआर मांगी है, इस पर जल्द अध्ययन कर रिपोर्ट भेजी जा रही है। |
-छोटे गधेरों में पनचक्की से बनाई जाए बिजली बड़े बांधों का विरोध किया सुंदरलाल बहुगुणा : पर्यावरणविद् पद्मभूषण सुंदर लाल बहुगुणा का कहना है कि पहाड़ की चोटियों पर पानी ले जाना चाहिए, उनके ढालों पर पेड़ लगाने चाहिए और बड़े बांधों के बजाय छोटे-छोटे गाड-गधेरों में पनचक्की से बिजली पैदा की जानी चाहिए। (धार ऐंच पाणी, ढाल पर डाला, बिजली बणावा खाला-खाला) उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ रहे सभी सियासी दलों के एजेंडा भी यह बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बांध पानीकी स्थायी समस्या का तात्कालिक हल है। रविवार को देहरादून के जीएमएस रोड स्थित एक होटल में 'चुनाव और हिमालय संसाधन एवं नीति' विषय पर पत्रकार वार्ता में सुंदर लाल बहुगुणा ने कहा कि राजनीति ही सब कुछ तय करती है, इसलिए चुनाव में आम जनता को जल, जंगल, जमीन के मुद्दों के सकारात्मक हल के लिए राजनीतिक दलों पर दबाव डालना चाहिए। राजनीतिक दलों के एजेंडे में पर्यावरण के मुद्दे न होना चिंता की बात है। उन्होंने देश में प्रकृति से सामंजस्य बनाती एक हिमालय नीति की जरूरत पर बल दिया। सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा ने कहा कि राजस्व बढ़ोतरी के लिए शराब को प्रोत्साहन देने का विरोध करना चाहिए। पद्मश्री डा.अनिल जोशी ने कहा कि देश में अब तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिए मूल प्राकृतिक संसाधनों के बजाय औद्योगिक वृद्धि, कृषि को आधार बनाया जाता रहा है। इस परंपरा को तोड़ते हुए जंगल, पानी, नदियों को जीडीपी का आधार बनाया जाना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो देश के जीडीपी में हिमालय की भागीदारी 40 प्रतिशत से भी ज्यादा हो जाएगी, मगर अफसोस कि राजनीतिक दल देश की आर्थिक, सामाजिक व सीमा की सुरक्षा करने वाले हिमालय पर ध्यान नहीं देते हैं। ंने कांग्रेस तथा यूपीए के खिलाफ भाजपा के मुददों के रूप में गिनाया। |
क्या होगा दिवाकर के इस्तीफे का हश्र सरकार से समर्थन वापसी पर जल्द फैसले के नहीं हालात सरकार में रहते हुए भी सरकार से बाहर रहने की उत्तराखंड क्रांति दल की रणनीति! उक्रांद नेता दिवाकर भट्ट ने मंत्री पद से इस्तीफा तो दे दिया है पर इसे मंजूरी नहीं मिली है। उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापसी की बात तो कर रही है पर पार्टी के नेता लोकसभा चुनाव को पहली प्राथमिकता बता रहे हैैं। जाहिर है कि इस मुद्दे पर जल्द फैसले के हालात नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इस इस्तीफे क्या हश्र होगा और चुनाव तक कोई तस्वीर साफ होगी या नहीं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस समय सूबे की भाजपा सरकार बहुमत के अंतिम पायदान पर खड़ी है। ऐसे में साथ चल रहे लोगों की सियासी चालें भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। काबीना मंत्री दिवाकर भट्ट को गत दिवस अचानक ही नैतिकता याद आ गई और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे डाला। मजेदार बात यह है कि उक्रांद के एक मात्र मंत्री ने इस्तीफा दे दिया पर पार्टी नेताओं के पास सरकार से समर्थन वापसी के मुद्दे पर निर्णय लेने को समय ही नहीं है। कहा जा रहा है कि उनके लिए लोकसभा चुनाव पहली प्राथमिकता है। इसके पीछे मंशा चाहे जो भी हो पर इतना साफ है कि उक्रांद इस मामले में कोई जल्दबाजी के मूड में नहीं है।पहले बात यूकेडी की। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या यह भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश है और अगर ऐसा है तो इस इस्तीफे का हश्र क्या होगा। अगर लोकसभा चुनाव होने तक उक्रांद नेताओं को समर्थन वापसी पर निर्णय का वक्त नहीं मिला तो यह क्षेत्रीय दल सरकार से बाहर होकर भी सरकार के साथ रहेगा। ऐसे में चुनाव में प्रचार के वक्त उक्रांद नेताओं के पास भाजपा पर तीखे प्रहार करने का मौका होगा। यानि मंशा 'सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे' वाली कहावत पर काम करने की है। अब यही स्टैंड पर कायम रहता है तो क्या यह माना जाएगा कि उसके रणनीतिकारों की नजर में वोटर के पास सोचने-समझाने की शक्ति नहीं और उक्रांद गठबंधन धर्म के साथ ही प्रतिपक्षी का धर्म भी निभाना चाहता है, लेकिन क्या यह मुमकिन है। इस सबके अलावा इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र बिंदु दिवाकर भट्ट की रणनीति क्या है, इसे लेकर भी कयास ही लगाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब कुछ अर्सा पहले उन पर इस्तीफे का भारी दबाव था तब उन्होंने न केवल इससे किनारा कर लिया था बल्कि परोक्ष रूप से अपनी ही पार्टी को चेतावनी भी दे डाली थी।अब एक नजर भाजपा पर, यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं लगता कि बहुमत की कगार पर खड़ी भाजपा में ऐन चुनाव के वक्त इस राजनैतिक घटनाक्रम से कोई खलबली नजर नहीं आ रही है। जाहिर है कि या तो पार्टी सब कुछ मैनेज करने को इस कदर भरोसेमंद है कि उसे सरकार के भविष्य की कोई चिंता ही नहीं, या फिर उसकी नजर में यह परिणति उक्रांद के अंदरूनी संघर्ष की है, जिसे नियंत्रित करना पार्टी की खुद की ही जिम्मेदारी है।---पहले विभाग से दिया था इस्तीफादेहरादून: लगता है दिवाकर को इस्तीफे से खासा लगाव है। आठ माह पहले ही दिवाकर ने इसी तरह अचानक ही खाद्य विभाग से इस्तीफा दे दिया था। कई रोज तक राजनीतिक नाटक चला और दिवाकर विभाग संभाले रहे। चर्चा है कि इस बार भी कहीं ऐसा ही तो नहीं होने वाला। ---------उक्रांद से चल रही है बातचीत: डा.जैन राज्य सरकार अपने दम पर अभी भी बहुमत में : भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी डा.अनिल जैन ने कहा कि प्रदेश सरकार पर कोई संकट नहीं है। संख्या बल के आधार पर भाजपा अपने दम पर बहुमत में है। वैसे उक्रांद के साथ भी बातचीत चल रही है।प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में डा.जैन ने कहा कि मौजूदा 68 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के 35 विधायक हैं। दो निर्दलियों का भी समर्थन है। यूकेडी से भी बातचीत चल रही है। ऐसे में कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।उन्होंने कहा कि पहले फेज के चुनाव ने भाजपा तथा एनडीए खेमे को खुश होने का मौका दिया है, लालू यादव की तरह कुछ और लोग हैं जिन्हें झाल्लाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने एक बार फिर से भाजपा के मुद्दों को गिनाया। उन्होंने कहा कि स्विस बैंकों में भारतीयों के काले धन को वापस लाने में आखिर किसे दिक्कत हो सकती है। यूपीए का उत्तराखंड के साथ सौतेला व्यवहार और आतंकवादी हमलों को उन्होंने कांग्रेस तथा यूपीए के खिलाफ भाजपा के मुददों के रूप में गिनाया। |
प्रदेश में हर साल बढ़ जाते हैं ५००० पेंशनरपेंशन बिल अब १००० करोड़ देहरादून। बढ़ता पेंशन बिल भी अब सरकार के आर्थिक मोरचे पर परेशानी का सबब बन रहा है। रिटायर होने वाले कर्मियों की सं2या में तेजी से इजाफा होने का अनुमान है। ऐसे में सरकार को पेंशन केलिए ही खासी धनराशि जुटानी पड़ सकती है। पेंशन रिवीजन के कारण ही सरकार को करीब ३०० करोड़ का अतिरि1त आर्थिक व्यय भार वहन करना पड़ रहा है।छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद से ही पेंशन पर करीब ४० प्रतिशत का इजाफा हुआ है। एरियर को छोड़ भी दिया जाए तो पेंशन पर ही हजार करोड़ से अधिक का व्यय भार है। यह राशि आने वाले समय में तेजी से बढ़ेगी। वि8ा विभाग के अनुमान के मुताबिक २००९-१० में ही करीब ४००० सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत हो जाएंगे। इतने कर्मियों का पेंशन व्यय भार तो बढ़ेगा ही। खास बात यह है कि प्रदेश में प्रति वर्ष औसत ५००० पेंशनर बढऱहे हैं। २०१५ तक पेंशनरों की सं2या सवा ला2ा के करीब होगी। प्रदेश में इतने ही राज्य कर्मचारी भी हैं। इस समय करीब ९० हजार हैं और इनपर देयता भी १०३६ करोड़ बन रही है। राज्य गठन के समय करीब ४४ हजार पेंशनर राज्य में थे और देयता भी करीब १४५ करोड़ की ही बनी थी। साफ है कि पेंशन बिल भी आर्थिक मोरचे पर सरकार को परेशान कर सकते हैं। हालांकि, शासन का मानना है कि लगातार बढ़ रहे इस वर्ग को बोझा न मानकर संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। १९, अप्रैलइस बार कष्टकारी नहीं होगी बदरी-केदार यात्राअधिकांश स्थानों पर सड़क निर्माण का कार्य हुआ पूरा अमर उजाला 4यूरोदेहरादून। बदरी-केदार धाम की यात्रा के लिए इस बार यात्रियों को खराब रास्तों की समस्या से नहीं जूझाना होगा। पूरे रूट पर केवल कुछ किमी के टुकड़े को छोड़ दिया जाए तो शेष यात्रा को निरापद बना दिया गया है। यही नहीं, पिछले सालों की तुलना में यात्रा मार्ग पर इस साल जोखिम भी कम हो गया है। हालांकि, प्रदेश में ५०० से अधिक स्थल चिक्षित किए गए थे। इनमें यात्रा रूट के अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा उपाय भी पूरे कर लिए गए हैं। चार धाम यात्रा शुरू होने में मात्र एक सप्ताह बचा है। इस बीच यात्रा मार्ग को दुरुस्त किये जाने का काम भी अंतिम चरण में हैं। पिछले कुछ सालों से यात्रा मार्ग की हालत काफी बिगड़ी हुई थी। डलब लेन होने के कारण जगह-जगह निर्माण कार्य चल रहा है। प्रशासन को भी यात्रा सीजन के दौरान मार्गों के खराब हालत को लेकर खासी मुसीबत उठानी होती है। पिछला यात्रा सीजन तो जैसे-तैसे निपटने के बाद शासन और प्रशासन के स्तर पर यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश जारी होते रहे हैं। हालांकि, अभी पूरा मार्ग पर काम समाप्त नहीं हुआ है। लेकिन स्थितियां पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है। मंडलायु1त की ओर यात्रा प्रशासन की ओर से यात्रा शुरू होने से पूर्व अधिकांश स्थलों पर काम पूरा करने का दबाव बना हुआ है। यह माना जा रहा है कि यात्रियों के लिए इस बार की यात्रा पिछले साल की तरह कष्टकारी नहीं होगी। |
प्रोटीन की खान हैं पहाड़ी अनाजनई टिहरी। अल्पप्रयुक्त होने वाले मंडुवा, रामदाना एवं झांगोरा जैसे अनाज अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इनका प्रयोग बिस्कुट बनाने से लेकर हलुवा, क्रिस्पीज, गुलगुला, बड़ी और पापड़ बनाने में भी होने लगा है।मंडुवे का उपयोग पहले रोटी बनाने के लिए होता था। इसकी रोटी काली सी होती है। रानीचौरी परिसर के वैज्ञानिकों ने इसकी ब्रीड में परिवर्तन किया है। जिससे मंडुवे की रोटी भी गेहंू की तरह हो गई है। मंडुवे के बिस्कुट की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह मंडुवे में अधिक पोषक तत्व होना है। रामदाने का हलवा भी गुणकारी मानते हुए वैज्ञानिकों ने इसे बहुत अच्छा बताया है। झांगोरा से स्नै1स, क्रिस्पजी, पापड़ आदि भी बनाए जा रहे हैं। पर्वतीय परिसर के कृषि वैज्ञानिक प्रो.एम द8ाा एवं डा. विजय यादव बताते हैं कि किसानों को मोटे अनाजों से वैज्ञानिक विधि के आधार पर नए दौर के भोज्य पदार्थं बनाने की जानकारी देने से उनकी आय बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि परिसर की ओर से परंपरागत फसलों से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता में स्वाद, रंग और स्वरूप के आधार पर किए गए मूल्यांकन में भी इनका प्रतिशत बहुत अच्छा रहा है। |
-गढ़वाल फिल्म से शुरू किया फिल्मों का सफर -माया नगरी में अलग पहचान बनाना चाहती है चारु -दर्शिल सफारी के साथ कर रही है एक फिल्म बालीवुड में देहरादून की एक और बाला ने दस्तक दी है। गढ़वाली फिल्म 'ब्यो' से शुरुआत करने वाली चारु शर्मा इन दिनों मशहूर फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन के साथ 'बम-बम बोले' में अपनी अभिनय कला के जौहर दिखा रही हैं। इस फिल्म में 'तारे जमीन पर' फेम दर्शिल सफारी मुख्य भूमिका में हैं। रविवार को देहरादून में पत्रकारों से बातचीत में चारु ने बताया कि उन्होंने कैरियर की शुरूआत गढ़वाली फिल्म 'ब्यो' से की थी। इसके बाद वह चंडीगढ़ में एयरलाइंस कंपनी से जुड़ गई। वहां उनकी मुलाकात मनोज अग्रवाल से हुई। जिन्होंने उसे अपनी फिल्म 'शाबाश' में लीड रोल दिया। यह फिल्म जल्द रिलीज होने वाली है। मनोज अग्रवाल ने ही चारु को प्रियदर्शन से मिलाया। जिन्होंने उसे फिल्म 'बमबम बोले' में रोल दिया। चारू कहती हैं कि यह रोल आमिर खान के उस रोल की तरह है, जो उन्होंने तारे जमीन पर फिल्म में किया था। इससे पूर्व वह साउथ की दो फिल्मों व विक्रम भट्ट द्वारा निर्देशित छोटे परदे पर आने वाली एक शार्ट फिल्म 'शोहरत, नफरत और शो-बिज' में अपनी कला के जौहर दिखा चुकी हैं। वह बचपन से ही अमिताभ बच्चन, आमिर खान और श्रीदेवी की फैन रही हैं। अपनी मेहनत पर विश्वास करने वाली चारु का मानना है कि बालीवुड में यूथ को काफी स्ट्रगल करना पड़ता है। फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के लिए कोई शार्टकट नहीं होता। इसके लिए कड़ी मेहनत जरूरी है। प्रारंभिक शिक्षा जीजीआईसी इंटर कालेज राजपुर रोड और ग्रेजुएशन डीएवी पीजी से करने वाली चारू की माता हेमवंती शर्मा जूनियर हाई स्कूल में शिक्षिका हैं। उनसे बड़ी दो बहनें हैं तथा भाई सबसे छोटा है। |
| खतरे में नैनीताल: दरक सकता है बलिया नाला! -करोड़ों खर्च होने के बाद भी भू-स्खलन का खतरा आशंका: कई गांव की करीब 20 हजार आबादी आ सकती है खतरे की जद में -भाजपा विधायक ने शासन को लिखी चिट्ठी, आशंका जताई हल्द्वानी: बलिया नाला एक बार फिर नैनीताल के लिए खतरा बन गया है। नाले के आसपास पहाड़ों में पड़ी दरारें बढ़ती जा रही हैैं। साथ ही धीमी गति से भू-स्खलन भी हो रहा है। खतरा नजर भले ही न आ रहा हो मगर बरसात के समय तबाही मचा सकता है। भाजपा विधायक ने भी भयावह होती स्थिति से शासन को अवगत करा दिया है। नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध झाील का लुत्फ उठाने देश ही नहीं बल्कि विश्वभर के लोग हर साल और हर समय आते हैैं। इस झाील में पानी संतुलन से अधिक न हो, इसके लिए बलिया नाला निकाला गया है। जो झाील से ब्रेबरी पुल तक है। यह नाला अंग्र्रेजों ने निकाला था। इस नाले में होकर झाील का पानी रानीबाग में आकर गौला नदी में मिलता है। चार साल पहले इस नाले को 15.56 करोड़ के प्रोजेक्ट से तैयार किया गया है। बावजूद इसमें भू-स्खलन की स्थिति बनी रहने से इसकी गुणवत्ता पर उंगलियां उठा रही है। सिंचाई विभाग के सूत्र बताते हैैं कि वीरभट्टी, कृष्णापुर, रहीश होटल का क्षेत्र, राजकीय इंटर कालेज और आलूखेत में पड़ी दरारें अभी तक ज्यों की त्यों हैैं। यह हाल गरमी के समय में है। यह हाल बढ़ती आबादी और आवागमन से बढ़ते बोझा से पैदा हो रही है। स्थिति से भाजपा विधायक खडग़ सिंह बोहरा ने भी शासन को अवगत करा दिया है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि बलिया नाला नैनीताल की नींव है। उसमें करोड़ों खर्च के बावजूद भू-स्खलन की स्थिति बनी हुई है। नाले की तली और साइडें वीरभट्टी तक पक्की है। नाले की बुनियाद और उसके दोनों ओर की पहाडिय़ों का भारी कटाव व धसाव अभी भी हो रहा है, जो नैनीताल के लिए कभी खतरा बन सकता है। इस स्थिति को गंभीरता से लिए बिना अगर झाील संरक्षण योजना या फिर जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत कार्य कराये जा रहे हैैं, तो वह सभी कार्य व्यर्थ हैं। इधर, राज्य उद्यमिता विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष डा.रमेश पांडे ने फोन पर बताया कि आधा दर्जन इलाके खतरे में हैैं। इस बाबत तत्कालीन कांग्र्रेस सरकार में उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखकर दिया था, जिसमें उन्होंने रोप-वे की तर्ज पर स्वीडन अथवा और कहीं विदेश के इंजीनियर बुलाकर मजबूती से काम कराने की मांग की गई थी। इंसेट:::::::::शासन ने मांगी डीपीआर हल्द्वानी: सिंचाई विभाग उत्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एबी पाठक भी नाले की कमजोरी स्वीकारते हैैं। उनका कहना है कि झाील से लेकर करीब डेढ़ किमी तक नाले का तल कुछ साल पहले पक्का कर दिया था। बाकी हिस्सा कच्चा है। जहां पहाड़ कमजोर हैैं वहां भू-स्खलन की स्थिति से हालत चिंताजनक हो जाती है। विभाग पूरी नजर रखे हुए है। शासन ने भी बलिया नाले की डीपीआर मांगी है, इस पर जल्द अध्ययन कर रिपोर्ट भेजी जा रही है। |
-छोटे गधेरों में पनचक्की से बनाई जाए बिजली बड़े बांधों का विरोध किया सुंदरलाल बहुगुणा : पर्यावरणविद् पद्मभूषण सुंदर लाल बहुगुणा का कहना है कि पहाड़ की चोटियों पर पानी ले जाना चाहिए, उनके ढालों पर पेड़ लगाने चाहिए और बड़े बांधों के बजाय छोटे-छोटे गाड-गधेरों में पनचक्की से बिजली पैदा की जानी चाहिए। (धार ऐंच पाणी, ढाल पर डाला, बिजली बणावा खाला-खाला) उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ रहे सभी सियासी दलों के एजेंडा भी यह बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बांध पानीकी स्थायी समस्या का तात्कालिक हल है। रविवार को देहरादून के जीएमएस रोड स्थित एक होटल में 'चुनाव और हिमालय संसाधन एवं नीति' विषय पर पत्रकार वार्ता में सुंदर लाल बहुगुणा ने कहा कि राजनीति ही सब कुछ तय करती है, इसलिए चुनाव में आम जनता को जल, जंगल, जमीन के मुद्दों के सकारात्मक हल के लिए राजनीतिक दलों पर दबाव डालना चाहिए। राजनीतिक दलों के एजेंडे में पर्यावरण के मुद्दे न होना चिंता की बात है। उन्होंने देश में प्रकृति से सामंजस्य बनाती एक हिमालय नीति की जरूरत पर बल दिया। सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा ने कहा कि राजस्व बढ़ोतरी के लिए शराब को प्रोत्साहन देने का विरोध करना चाहिए। पद्मश्री डा.अनिल जोशी ने कहा कि देश में अब तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना के लिए मूल प्राकृतिक संसाधनों के बजाय औद्योगिक वृद्धि, कृषि को आधार बनाया जाता रहा है। इस परंपरा को तोड़ते हुए जंगल, पानी, नदियों को जीडीपी का आधार बनाया जाना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो देश के जीडीपी में हिमालय की भागीदारी 40 प्रतिशत से भी ज्यादा हो जाएगी, मगर अफसोस कि राजनीतिक दल देश की आर्थिक, सामाजिक व सीमा की सुरक्षा करने वाले हिमालय पर ध्यान नहीं देते हैं। ंने कांग्रेस तथा यूपीए के खिलाफ भाजपा के मुददों के रूप में गिनाया। |
क्या होगा दिवाकर के इस्तीफे का हश्र सरकार से समर्थन वापसी पर जल्द फैसले के नहीं हालात सरकार में रहते हुए भी सरकार से बाहर रहने की उत्तराखंड क्रांति दल की रणनीति! उक्रांद नेता दिवाकर भट्ट ने मंत्री पद से इस्तीफा तो दे दिया है पर इसे मंजूरी नहीं मिली है। उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापसी की बात तो कर रही है पर पार्टी के नेता लोकसभा चुनाव को पहली प्राथमिकता बता रहे हैैं। जाहिर है कि इस मुद्दे पर जल्द फैसले के हालात नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इस इस्तीफे क्या हश्र होगा और चुनाव तक कोई तस्वीर साफ होगी या नहीं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस समय सूबे की भाजपा सरकार बहुमत के अंतिम पायदान पर खड़ी है। ऐसे में साथ चल रहे लोगों की सियासी चालें भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन रही हैं। काबीना मंत्री दिवाकर भट्ट को गत दिवस अचानक ही नैतिकता याद आ गई और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे डाला। मजेदार बात यह है कि उक्रांद के एक मात्र मंत्री ने इस्तीफा दे दिया पर पार्टी नेताओं के पास सरकार से समर्थन वापसी के मुद्दे पर निर्णय लेने को समय ही नहीं है। कहा जा रहा है कि उनके लिए लोकसभा चुनाव पहली प्राथमिकता है। इसके पीछे मंशा चाहे जो भी हो पर इतना साफ है कि उक्रांद इस मामले में कोई जल्दबाजी के मूड में नहीं है।पहले बात यूकेडी की। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या यह भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश है और अगर ऐसा है तो इस इस्तीफे का हश्र क्या होगा। अगर लोकसभा चुनाव होने तक उक्रांद नेताओं को समर्थन वापसी पर निर्णय का वक्त नहीं मिला तो यह क्षेत्रीय दल सरकार से बाहर होकर भी सरकार के साथ रहेगा। ऐसे में चुनाव में प्रचार के वक्त उक्रांद नेताओं के पास भाजपा पर तीखे प्रहार करने का मौका होगा। यानि मंशा 'सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे' वाली कहावत पर काम करने की है। अब यही स्टैंड पर कायम रहता है तो क्या यह माना जाएगा कि उसके रणनीतिकारों की नजर में वोटर के पास सोचने-समझाने की शक्ति नहीं और उक्रांद गठबंधन धर्म के साथ ही प्रतिपक्षी का धर्म भी निभाना चाहता है, लेकिन क्या यह मुमकिन है। इस सबके अलावा इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र बिंदु दिवाकर भट्ट की रणनीति क्या है, इसे लेकर भी कयास ही लगाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब कुछ अर्सा पहले उन पर इस्तीफे का भारी दबाव था तब उन्होंने न केवल इससे किनारा कर लिया था बल्कि परोक्ष रूप से अपनी ही पार्टी को चेतावनी भी दे डाली थी।अब एक नजर भाजपा पर, यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं लगता कि बहुमत की कगार पर खड़ी भाजपा में ऐन चुनाव के वक्त इस राजनैतिक घटनाक्रम से कोई खलबली नजर नहीं आ रही है। जाहिर है कि या तो पार्टी सब कुछ मैनेज करने को इस कदर भरोसेमंद है कि उसे सरकार के भविष्य की कोई चिंता ही नहीं, या फिर उसकी नजर में यह परिणति उक्रांद के अंदरूनी संघर्ष की है, जिसे नियंत्रित करना पार्टी की खुद की ही जिम्मेदारी है।---पहले विभाग से दिया था इस्तीफादेहरादून: लगता है दिवाकर को इस्तीफे से खासा लगाव है। आठ माह पहले ही दिवाकर ने इसी तरह अचानक ही खाद्य विभाग से इस्तीफा दे दिया था। कई रोज तक राजनीतिक नाटक चला और दिवाकर विभाग संभाले रहे। चर्चा है कि इस बार भी कहीं ऐसा ही तो नहीं होने वाला। ---------उक्रांद से चल रही है बातचीत: डा.जैन राज्य सरकार अपने दम पर अभी भी बहुमत में : भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी डा.अनिल जैन ने कहा कि प्रदेश सरकार पर कोई संकट नहीं है। संख्या बल के आधार पर भाजपा अपने दम पर बहुमत में है। वैसे उक्रांद के साथ भी बातचीत चल रही है।प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में डा.जैन ने कहा कि मौजूदा 68 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के 35 विधायक हैं। दो निर्दलियों का भी समर्थन है। यूकेडी से भी बातचीत चल रही है। ऐसे में कोई दिक्कत वाली बात नहीं है।उन्होंने कहा कि पहले फेज के चुनाव ने भाजपा तथा एनडीए खेमे को खुश होने का मौका दिया है, लालू यादव की तरह कुछ और लोग हैं जिन्हें झाल्लाते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने एक बार फिर से भाजपा के मुद्दों को गिनाया। उन्होंने कहा कि स्विस बैंकों में भारतीयों के काले धन को वापस लाने में आखिर किसे दिक्कत हो सकती है। यूपीए का उत्तराखंड के साथ सौतेला व्यवहार और आतंकवादी हमलों को उन्होंने कांग्रेस तथा यूपीए के खिलाफ भाजपा के मुददों के रूप में गिनाया। |
प्रदेश में हर साल बढ़ जाते हैं ५००० पेंशनरपेंशन बिल अब १००० करोड़ देहरादून। बढ़ता पेंशन बिल भी अब सरकार के आर्थिक मोरचे पर परेशानी का सबब बन रहा है। रिटायर होने वाले कर्मियों की सं2या में तेजी से इजाफा होने का अनुमान है। ऐसे में सरकार को पेंशन केलिए ही खासी धनराशि जुटानी पड़ सकती है। पेंशन रिवीजन के कारण ही सरकार को करीब ३०० करोड़ का अतिरि1त आर्थिक व्यय भार वहन करना पड़ रहा है।छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद से ही पेंशन पर करीब ४० प्रतिशत का इजाफा हुआ है। एरियर को छोड़ भी दिया जाए तो पेंशन पर ही हजार करोड़ से अधिक का व्यय भार है। यह राशि आने वाले समय में तेजी से बढ़ेगी। वि8ा विभाग के अनुमान के मुताबिक २००९-१० में ही करीब ४००० सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत हो जाएंगे। इतने कर्मियों का पेंशन व्यय भार तो बढ़ेगा ही। खास बात यह है कि प्रदेश में प्रति वर्ष औसत ५००० पेंशनर बढऱहे हैं। २०१५ तक पेंशनरों की सं2या सवा ला2ा के करीब होगी। प्रदेश में इतने ही राज्य कर्मचारी भी हैं। इस समय करीब ९० हजार हैं और इनपर देयता भी १०३६ करोड़ बन रही है। राज्य गठन के समय करीब ४४ हजार पेंशनर राज्य में थे और देयता भी करीब १४५ करोड़ की ही बनी थी। साफ है कि पेंशन बिल भी आर्थिक मोरचे पर सरकार को परेशान कर सकते हैं। हालांकि, शासन का मानना है कि लगातार बढ़ रहे इस वर्ग को बोझा न मानकर संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। १९, अप्रैलइस बार कष्टकारी नहीं होगी बदरी-केदार यात्राअधिकांश स्थानों पर सड़क निर्माण का कार्य हुआ पूरा अमर उजाला 4यूरोदेहरादून। बदरी-केदार धाम की यात्रा के लिए इस बार यात्रियों को खराब रास्तों की समस्या से नहीं जूझाना होगा। पूरे रूट पर केवल कुछ किमी के टुकड़े को छोड़ दिया जाए तो शेष यात्रा को निरापद बना दिया गया है। यही नहीं, पिछले सालों की तुलना में यात्रा मार्ग पर इस साल जोखिम भी कम हो गया है। हालांकि, प्रदेश में ५०० से अधिक स्थल चिक्षित किए गए थे। इनमें यात्रा रूट के अधिकांश स्थानों पर सुरक्षा उपाय भी पूरे कर लिए गए हैं। चार धाम यात्रा शुरू होने में मात्र एक सप्ताह बचा है। इस बीच यात्रा मार्ग को दुरुस्त किये जाने का काम भी अंतिम चरण में हैं। पिछले कुछ सालों से यात्रा मार्ग की हालत काफी बिगड़ी हुई थी। डलब लेन होने के कारण जगह-जगह निर्माण कार्य चल रहा है। प्रशासन को भी यात्रा सीजन के दौरान मार्गों के खराब हालत को लेकर खासी मुसीबत उठानी होती है। पिछला यात्रा सीजन तो जैसे-तैसे निपटने के बाद शासन और प्रशासन के स्तर पर यात्रा मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश जारी होते रहे हैं। हालांकि, अभी पूरा मार्ग पर काम समाप्त नहीं हुआ है। लेकिन स्थितियां पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है। मंडलायु1त की ओर यात्रा प्रशासन की ओर से यात्रा शुरू होने से पूर्व अधिकांश स्थलों पर काम पूरा करने का दबाव बना हुआ है। यह माना जा रहा है कि यात्रियों के लिए इस बार की यात्रा पिछले साल की तरह कष्टकारी नहीं होगी। |
प्रोटीन की खान हैं पहाड़ी अनाजनई टिहरी। अल्पप्रयुक्त होने वाले मंडुवा, रामदाना एवं झांगोरा जैसे अनाज अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इनका प्रयोग बिस्कुट बनाने से लेकर हलुवा, क्रिस्पीज, गुलगुला, बड़ी और पापड़ बनाने में भी होने लगा है।मंडुवे का उपयोग पहले रोटी बनाने के लिए होता था। इसकी रोटी काली सी होती है। रानीचौरी परिसर के वैज्ञानिकों ने इसकी ब्रीड में परिवर्तन किया है। जिससे मंडुवे की रोटी भी गेहंू की तरह हो गई है। मंडुवे के बिस्कुट की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह मंडुवे में अधिक पोषक तत्व होना है। रामदाने का हलवा भी गुणकारी मानते हुए वैज्ञानिकों ने इसे बहुत अच्छा बताया है। झांगोरा से स्नै1स, क्रिस्पजी, पापड़ आदि भी बनाए जा रहे हैं। पर्वतीय परिसर के कृषि वैज्ञानिक प्रो.एम द8ाा एवं डा. विजय यादव बताते हैं कि किसानों को मोटे अनाजों से वैज्ञानिक विधि के आधार पर नए दौर के भोज्य पदार्थं बनाने की जानकारी देने से उनकी आय बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि परिसर की ओर से परंपरागत फसलों से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता में स्वाद, रंग और स्वरूप के आधार पर किए गए मूल्यांकन में भी इनका प्रतिशत बहुत अच्छा रहा है। |
-गढ़वाल फिल्म से शुरू किया फिल्मों का सफर -माया नगरी में अलग पहचान बनाना चाहती है चारु -दर्शिल सफारी के साथ कर रही है एक फिल्म बालीवुड में देहरादून की एक और बाला ने दस्तक दी है। गढ़वाली फिल्म 'ब्यो' से शुरुआत करने वाली चारु शर्मा इन दिनों मशहूर फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन के साथ 'बम-बम बोले' में अपनी अभिनय कला के जौहर दिखा रही हैं। इस फिल्म में 'तारे जमीन पर' फेम दर्शिल सफारी मुख्य भूमिका में हैं। रविवार को देहरादून में पत्रकारों से बातचीत में चारु ने बताया कि उन्होंने कैरियर की शुरूआत गढ़वाली फिल्म 'ब्यो' से की थी। इसके बाद वह चंडीगढ़ में एयरलाइंस कंपनी से जुड़ गई। वहां उनकी मुलाकात मनोज अग्रवाल से हुई। जिन्होंने उसे अपनी फिल्म 'शाबाश' में लीड रोल दिया। यह फिल्म जल्द रिलीज होने वाली है। मनोज अग्रवाल ने ही चारु को प्रियदर्शन से मिलाया। जिन्होंने उसे फिल्म 'बमबम बोले' में रोल दिया। चारू कहती हैं कि यह रोल आमिर खान के उस रोल की तरह है, जो उन्होंने तारे जमीन पर फिल्म में किया था। इससे पूर्व वह साउथ की दो फिल्मों व विक्रम भट्ट द्वारा निर्देशित छोटे परदे पर आने वाली एक शार्ट फिल्म 'शोहरत, नफरत और शो-बिज' में अपनी कला के जौहर दिखा चुकी हैं। वह बचपन से ही अमिताभ बच्चन, आमिर खान और श्रीदेवी की फैन रही हैं। अपनी मेहनत पर विश्वास करने वाली चारु का मानना है कि बालीवुड में यूथ को काफी स्ट्रगल करना पड़ता है। फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के लिए कोई शार्टकट नहीं होता। इसके लिए कड़ी मेहनत जरूरी है। प्रारंभिक शिक्षा जीजीआईसी इंटर कालेज राजपुर रोड और ग्रेजुएशन डीएवी पीजी से करने वाली चारू की माता हेमवंती शर्मा जूनियर हाई स्कूल में शिक्षिका हैं। उनसे बड़ी दो बहनें हैं तथा भाई सबसे छोटा है। |
Monday, April 20, 2009
Thursday, April 9, 2009
Wednesday, April 1, 2009

सरकारी कालेजों की परीक्षा निजी संस्थानों में
, हल्द्वानी: विवादों में रहना कुमाऊं विश्र्वविद्यालय की नियति बन गयी है। बीएड परीक्षा की तिथि घोषित हो गयी है। इसके साथ ही एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। अब एमबी पीजी कालेज में बीएड परीक्षार्थियों ने कुलपति व उच्च शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर निजी कालेज में परीक्षा न कराने का अनुरोध किया है। कुमाऊं विश्र्वविद्यालय की ओर से संचालित बीएड-2007 की परीक्षा 11 अप्रैल से होनी है। मंडल में पांच कालेजों को परीक्षा केन्द्र बनाया गया है। इसमें एसएसजे परिसर अल्मोड़ा व राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पिथौरागढ़ की परीक्षा एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में, एमबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी, जेएन कौल भीमताल, जय अरिहंत, लालबहादुर शास्त्री तकनीकी कालेज, हल्दूचौड़, इन्सपीरेशन कालेज काठगोदाम की परीक्षा आम्रपाली संस्थान में होगी। चन्द्रावती तिवारी कन्या महाविद्यालय काशीपुर, श्रीराम संस्थान काशीपुर और सल्ट संस्थान, सल्ट की परीक्षा श्रीराम संस्थान काशीपुर में होगी। देवभूमि संस्थान रुद्रपुर, द्रोण बीएड कालेज रुद्रपुर, सरस्वती संस्थान रुद्रपुर की परीक्षा सरस्वती संस्थान रुद्रपुर में होगी। देवभूमि संस्थान बनबसा, गुरुनानक डिग्री कालेज नानकमत्ता व डा. सुशीला तिवारी डिग्री कालेज सितारगंज की परीक्षा देवभूमि संस्थान बनबसा में आयोजित होगी। परीक्षायें 11 अप्रैल से शुरू होंगी और 25 अप्रैल तक होंगी। इधर एमबी पीजी कालेज के बीएड परीक्षार्थियों ने शहर से दूर परीक्षा केन्द्र बनाये जाने पर आपत्ति जाहिर की है। इसके लिये उन्होंने कुमाऊं विश्र्वविद्यालय के कुलपति और उच्च शिक्षा सचिव को पत्र भेजकर स्ववित्तपोषित केन्द्र में परीक्षा न कराये जाने की मांग की है। कुमाऊं विश्र्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव पीएन पंत इस पर किसी भी तरह की टिप्पणी देने से इंकार कर दिया।
राज्य को रोशन करेगा खंदूखाल
श्रीनगर गढ़वाल: सब कुछ ठीक चला तो अगले कुछ सालों में श्रीनगर का खंदूखाल उत्तराखंड सहित देशभर को रोशन करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। यहां लगभग दो सौ करोड़ की लागत से अलग-अलग क्षमताओं के तीन विद्युत स्टेशन शुरू करने की योजना है। अच्छी बात यह है कि इन पर कार्य शुरू भी किया जा चुका है। अधिकारियों की मानें, तो वर्ष 2011 तक यह क्षेत्र इलेक्टि्रसिटी हब के तौर पर पहचान बना लेगा। उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश के तौर पर विकसित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग क्षमताओं वाली परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें श्रीनगर में 330 मेगावाट, लाता तपोवन में 171 मेगावाट, बदरीनाथ में 140 मेगावाट, विष्णुगाड़ में 520 मेगावाट, पीपलकोटी में 444 मेगावाट, बावला (नंदप्रयाग) में 300 मेगावाट, लंगासू में 141 मेगावाट, देवसारी में 300 मेगावाट, रामबाड़ा में 76 मेगावाट, सिगनौली में 99 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं प्रस्तावित या निर्माणाधीन हैं। ऊर्जा निगम इन परियोजनाओं को लेकर तो उत्साहित है, लेकिन अब तक यहां से मिलने वाली बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था न होना उसकी परेशानी का सबब बनी हुई थी। अब उसकी यह समस्या हल होने वाली है। निगम ने श्रीनगर के खंदूखाल को विद्युत आपूर्ति स्टेशन के लिए चुना है। जानकारी के मुताबिक यहां करीब 18 हेक्टेअर क्षेत्र में 180 करोड़ रुपये की लागत से विद्युत स्टेशन स्थापित करने की योजना है। 400, 200 और 132 केवी क्षमता के तीन स्टेशन यहां बनने हैं। इस बारे में अधिशासी अभियंता राजकुमार ने बताया कि जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली इसी विद्युत स्टेशन के माध्यम से नेशनल ग्रिड को भेजी जाएगी। इसके लिए खंदूखाल से काशीपुर तक 400 केवी विद्युत लाइन बिछाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यहां से 12 प्रतिशत बिजली उत्तराखंड को नि:शुल्क मिलेगी, जबकि शेष बिजली नेशनल ग्रिड में जाएगी। उन्होंने बताया कि खंदूखाल में अभी लैंड डवलपमेंट कार्य चल रहा है। खंदूखाल के अलावा पीपलकोट, कर्णप्रयाग, तपोवन, घनसाली, कौडि़याला, सतपुली और शिमली में भी अलग-अलग क्षमताओं के स्टेशन बनाए जाने की योजना है।
दरकते पहाड़, खिसकते खेत और सिसकती जिंदगी।
यहां लोक ढो रहा तंत्र का बोझ
उत्तरकाशी दरकते पहाड़, खिसकते खेत और सिसकती जिंदगी। यही है पहाड़ का सच। देश आजाद हुआ तो लगा अपना राज आ गया। देखते ही देखते साठ साल गुजर गए, लेकिन यह सिलसिला नहीं टूटा। इस बीच उत्तराखंड भी बन गया, लेकिन रिसते जख्म पर मरहम तब भी नहीं लगा। आज भी उत्तरकाशी के सेवा गांव के लोग पीठ पर लोकतंत्र का बोझ ढो रहे हैं। ठेठ चढ़ाई पर चलते वक्त पैर पर फूटते छालों का दर्द इस गांव के लोग ही सह सकते हैं। पीढि़यां ऐसे ही गुजर गई और अब भविष्य भी वहीं कहानी दोहरा रहा है। चिमनी के उजाले में रेडियो पर नेताओं के भाषण उनके मनोरंजन के साधन बना हुआ है। तहसील पुरोला के ब्लाक मोरी का सेवा गांव समुद्र तल से 26 सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मुख्यालय से 178 किमी. दूर 5 सौ वर्ग मीटर में फैले गांव की कुल 382 महिला पुरुषों में मात्र 30 प्रतिशत महिला पुरुष ही साक्षर हैं, बालिका शिक्षा का यहां हाल बेहाल है। 16 फीसदी साक्षर महिलाओं में से 5वीं के बाद बालिकाएं स्कूल ही नहीं जाती। शीतकाल में यह गांव 4 से 5 महीने के बर्फ में ढक जाता है और ऐसे में गांव के लोग अपने लड़कियों को 12 किमी. दूर जूनियर शिक्षा के लिए दोणी नहीं भेजते। सड़क से 12 किमी. दूर इस गांव में बिजली आज भी नहीं पहुंची है और संचार के नाम पर यहां सिर्फ रेडियो बजता है। सेब, नाशपाती और आडू उत्पादन यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है लेकिन गांव सड़क से दूर होने के कारण उत्पादन का बड़ा हिस्सा बाजार तक नहीं पहुंच पाता। ओलावृष्टि, सूखा, वनाग्नि के समय इस गांव के लोगों के सामने पहाड़ जैसी मुश्किलें होती है और ये लोग तब गेंहू, दाल, मंडवा व आलू पर ही निर्भर रहते हैं। चांद-सितारों की बातें और विकास का ढोल पीटने वाले नेता भी सेवा गांव के पैदल रास्ते नापने से कतराते हैं। उनकी कोशिश होती है कि गांव के मतदाताओं किसी तरह वोट उन्हें दें दे। अंगूठे के बाद अब इलैक्ट्रानिक वोटिंग मशीन तक मतदान पहुंच चुका है किन्तु सेवा के ग्रामीण आज भी अंगूठा टेक ही रह गए हैं।
आजादी के छह दशक बाद भी कृषि प्रधान देश में किसानों से जुड़े मुद्दे हाशिये पर हैं। लोकशाही के नुमाइंदे हों या व्यवस्था तंत्र, उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। राजधानी देहरादून से करीब 15 किमी दूर निर्माणाधीन सहस्त्रधारा-चामासारी मोटर मार्ग से पटेरू पटाली गांव के साथ ही ग्रामीणों के खेत भी खतरे की जद में आ चुके हैं।
हरीश रावत के खिलाफ मंगलौर में मामला दर्ज
हरिद्वार, : सौ गाडि़यों के काफिले के साथ चुनाव प्रचार कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत को महंगा पड़ गया। सोमवार को उनके जुलूस में बिना अनुमति सैकड़ों गाडि़यां शामिल होने के चलते मंगलौर में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इसके अलावा आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर नगर पालिकाध्यक्ष कमल जौरा समेत तीन अन्य की गाडि़यां भी प्रशासन ने सीज कर दी हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी शैलेश बगोली ने बताया कि उनके काफिले के लिए पांच गाडि़यों की आयोग ने परमीशन दी थी, लेकिन काफिले में सौ गाडि़यों से ज्यादा शामिल थीं।
पंतनगर विवि देश के सर्वश्रेष्ठ तीन संस्थानों में शामिल
देहरादून, : तकनीकी शिक्षा का स्तर सुधारने को विश्र्व बैंक की मदद दूसरे फेज में जारी रहे, इसके लिए राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों को एकेडमिक आटोनामी देनी होगी। इस संबंध में महकमे के प्रस्ताव का परीक्षण सरकार कर रही है। परफारमेंस में पंतनगर विवि देश के सर्वश्रेष्ठ तीन संस्थानों में शामिल है। राज्य को विश्र्व बैंक की प्रस्तावित दूसरे चरण की इस योजना में आर्थिक मदद पाने को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का बेसब्री से इंतजार तो किया जा रहा है, लेकिन मदद पाने के लिए उक्त सरकारी संस्थानों को एकेडमिक आटोनामी की दरकार है। महकमे के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में प्रस्ताव सरकार को सौंपा गया है। इस प्रस्ताव का परीक्षण कराया जा रहा है। प्रोजेक्ट का दूसरा चरण शुरू होने की स्थिति में परफारमेंस के आधार पर पंतनगर विवि का दावा ज्यादा पुख्ता माना जा रहा है। तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी) के तहत पहले चरण में राज्य के पांच शिक्षण संस्थानों को विश्र्व बैंक ने करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराई। संस्थानों को यह राशि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, फैकल्टी ट्रेनिंग, नेटवर्किंग व कम्युनिटी सर्विस में सदुपयोग करनी थी। सबसे ज्यादा राशि करीब 18 करोड़ गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्र्वविद्यालय पंतनगर को मिली। राज्य के लिए राहत की बात यह है कि उक्त योजना के तहत राज्य की परफारमेंस राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही है। इसमें पंतनगर विवि का योगदान ज्यादा है। तीन बार हुए आडिट में विवि ने दस में से औसतन 7.4 स्कोर किया। प्रोजेक्ट में चुने गए देशभर के 127 संस्थानों में भी बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले तीन संस्थानों में पंतनगर भी शामिल है। निजी संस्थान डीआईटी देहरादून को 5.5 करोड़, जीबी पंत इंजीनियरिंग कालेज घुड़दौड़ी पौड़ी को 5.3 करोड़ व राजकीय पालीटेक्निक देहरादून को 2.5 करोड़ की राशि मुहैया कराई गई। उक्त संस्थानों ने आडिट में औसत क्रमश: 5.9, 5.7 व 5.7 स्कोर किया। कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज द्वाराहाट को भी पहले चरण में तकरीबन 2.5 करोड़ की सहायता मिली, लेकिन बाद में प्रदर्शन दुरुस्त नहीं रहने पर उक्त कालेज लंबे समय तक प्रोजेक्ट से नहीं जुड़ सका। अब पहले चरण का प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। इसकी रिपोर्ट 31 मार्च तक केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी।
Monday, March 30, 2009
मै क्लर्क हू , सरकारी श्रस्टी का आधार स्तम्भ,
अनपढो के लिये पूर्ण ब्रह्म ,
अनादि काल से मेरा अस्तित्व है ,
यम राज के यहा भी ( चित्रगुप्त) मेरा प्रभुत्व है,
समय के साथ साथ मैने भी विकास किया है,
काय्स्थ , ्मुनिम , लिपिक से कलर्क तक का सफर तय किया है,
चम्चागिरी धर्म है मेरा , ओवरटाइम कर्म है मेरा,
बगल मे फाइलो की ढेरी, सामने कम्प्यूटर की भेरी,
भारतीय परजातन्त्र तेरे लिए पुन्य प्रसाद हू मै ,
लार्ड मैकाले की आखरी याद हु मै
अर्थशास्त्री मुझसे खौफ खाते है,
पन्च वर्शीय योजनाओ की विफल्ता का मुझे प्रमुख कारण ठ्हराते है.
सुबह देर से दफतर जाना, शाम को जल्दी घर आना,
आधा घन्टा चाय पीने मे तो घन्टा भर लगाना,
उस पर भी बोनस बोनस , डीए- डीए चिल्लाना
उन्हे कौन बताए मै सब कुछ कर सकता हु
क्लर्क से गवर्नर- जनरल बन सकता हू
बस की क्यू मे अडे अडे , विस्व राजनीति पर बहस कर सकता हू खडे खडे,
परमाणु कार्यकर्म , ड्ब्लूटीओ वार्ता, भारतीय हाकी - किर्केट,
कौन कैसे जीतता, कैसे हारता,
मै सब जानता हू , कैसे? चलो बताता हू, एक क्लर्क के ज्न्म की कथा सुनाता हू,
जब एक भावी क्लर्क पैदा होता है, जग हसता है वो रोता है,
माता लोरी देती है, पिता तान सुनाएगे-
हम अपने लाड्ले को डाक्टर , इन्जिनियर, आए ए एस बनाएगे,
प्बलिक स्कूल की खोज होती है,
पर उनकी जेब रोती है
हारकर- झकमारकर , सन्तोस कर लेते है,
लाड्ले को म्युनिसिप्ळ्टी के स्कूल मे डालकर
दस्वी मे साठ प्रतिसत, १२वी मे ५० और बीए मे ४५ प्रतिसत प्राप्त कर ,
वह लाल नाम कमाता है,
पढा लिखा बेरोजगार कहलाता है,
ओर दे डालता है ,
अधिकारी वर्ग की सैकडो प्रतियोगी प्ररीक्छाए ,
और वह किसी को भी लक्छ्म्ण रेखा की तरह पार नही कर पाता, और
टूटता है , वह बाद हर इम्तिहान के,
बामियान बुद्ध जैसे हाथ तालिबान के,
और तब वह सर्व ग्यानी होकर, अपना चार्म खोकर,
उतरता है स्टाफ सिलेक्स्न कमीशन के समरान्ग्न मे,
और पहूचता है, सरकारी कार्यालयो के प्रान्ग्न मे
रोज्गार पाते ही दोपाये से चौपाया होता है,
फिर सन्त्तती होती है , फिर जेब रोती है-----
और एक बार फिर वही स्ब कुछ दोहराया जाता है,
ओर तब वक्त की याज्सेना (द्रोप्दी) हस कर कह्ती है,
अन्धो के अन्धे और क्लर्को के क्लर्क
और चलता रह्ता है नियती चक्र - चलता रहता है नियती चक्र
Saturday, March 28, 2009
देहरादून: नगर निगम ने टैक्स जमा न करने पर राज प्लाजा में कुर्की की कार्रवाई करते हुए राज प्लाजा स्थित एक संस्थान और हिमालयन अपार्टमेंट स्थित एक बिल्डर के आफिस को सीज कर दिया है। इन पर लाखों रुपये बकाया था। नगर निगम के इस कदम से बकायेदारों में हड़कंप है। इन दिनों नगर निगम का कर वसूली पर खासा जोर है। इसके तहत टैक्स जमा न किए जाने पर गुरुवार को निगम की टीम ने दो के खिलाफ सीज करने की कार्रवाई की। राज प्लाजा स्थित आईएएफडी को नगर निगम ने सीज कर कर दिया। इस दौरान कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने हल्का विरोध भी किया। राज प्लाजा पर कुल तकरीबन साढ़े छह लाख का टैक्स बनता है।
झंडा मेले में दो पक्ष भिडे़, तीन धरे
देहरादून, जागरण संवाददाता: झंडे मेले में दो पक्षों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। इस दौरान कुछ दुकानों में तोड़फोड़ भी की गई। बताया गया कि लेनदेन को लेकर यह घटना हुई। पुलिस ने मौके पर तीन लोगों को गिरफ्तार कर मामला शांत कराया। इन दिनों कोतवाली क्षेत्र में झंडा मेला चल रहा है। पुलिस के मुताबिक गुरुवार को लेनदेन को लेकर दो गुटों के बीच विवाद हो गया। इनमें से एक ने मेले में खिलौनों की दुकान लगाई हुई है। पुलिस के मुताबिक दोनों गुटों में पैदा हुए विवाद के मारपीट हो गई। एक गुट ने दूसरे गुट की दुकान और अन्य दुकानों में तोड़फोड़ कर डाली। इससे मेला परिसर में बवाल हो गया। पुलिस को देखते ही कई लोग फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने एक मेला दुकानदार व एक गुट के दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इन तीनों लोगों के मारपीट में चोटें भी लगीं। पुलिस तीनों का दून अस्पताल में मेडिकल कराकर कोतवाली ले गई। एक गुट के आरोपी का नाम लक्ष्मण सिंह निवासी ग्राम नारंगी, चमोली और दूसरे गुट के आरोपियों के नाम सोनू निवासी शालीमार गार्डन थाना कोतवाली देहात जनपद सहारनपुर व दिनेश निवासी दीप नगर (देहरादून) बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक लक्ष्मण ने मेले में दुकान लगाई हुई है। पुलिस के मुताबिक सोनू शातिर बदमाश है और पूर्व में भी जेल जा चुका है। तीस तक संपूर्ण होगा मेला लोकसभा चुनाव की तैयारियों और शहर में बढ़ रही चोरियों की घटनाओं के मद्देनजर कोतवाली पुलिस ने झंडा मेके को 30 मार्च तक संपूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। कोतवाल जेपी जुयाल ने मेला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा के कारण 30 मार्च तक मेला संपूर्ण कर लिया जाए। मालूम हो कि मेले में बाहरी तत्त्वों की भीड़ लगी हुई है और शहर में चोरियों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि मेले के बहाने यहां पहुंचे कुछ अपराधी तत्त्व वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
एशियन शूटिंग के लए पूनम का चयन
देहरादून: अपनी प्रतिभा एवं अचूक निशाने के बूते विकलांग निशानेबाज पूनम कवि का कोरिया में 23 अप्रैल से होने वाली एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में चयन हुआ है। इससे पूर्व पूनम केरल में हुई 52वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण जीत चुकी हैं। साथ ही उन्होंने राज्य स्तरीय स्पर्धा में स्वर्ण व अखिल भारतीय स्पर्धा में रजत पदक भी हासिल किए। पूनम ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए लगातार कड़ी मेहनत की। उनकी सफलता में विकलांगता कभी रोड़ा नहीं बनी। बावजूद इसके प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें कोई प्रोत्साहन नहीं मिला है। पूनम का कहना है कि निशानेबाजी एक महंगा खेल है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए उसे आर्थिक कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है। पूनम ने बताया कि जसपाल राणा शूटिंग अकेडमी के सहयोग से वह अभ्यास जारी रखे हुए है। जसपाल राणा और राज्य निशानेबाजी संघ के अध्यक्ष नारायण सिंह राणा समय-समय पर उसे निशानेबाजी के गुर सिखाते हंै।
दोस्तों के सहयोग से शेखर ने छुआ शिखर
देहरादून, जागरण संवाददाता: छह दोस्तों का समूह, कुछ कर दिखाने की लगन और एक-दूसरे को पूरा सपोर्ट। कोई भी हिम्मत न हारे, इसलिए हर रोज एक-दूसरे की परेशानियों पर होती है चर्चा। इन्हीं दोस्तों में से एक हैं- शेखर रमोला। शेखर ने सहायक कमांडेंट परीक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया। शेखर इस सफलता का श्रेय दोस्तों को देते हैं। उनका कहना है कि मंजिल अभी दूर है, लेकिन यहां तक का सफर दोस्तों के सपोर्ट से ही पूरा हुआ है। उनका सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है। देहरादून के शास्त्री नगर निवासी शेखर रमोला के पिता प्रकाश चंद रमोला सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनकी माता गृहणी हैं। शेखर ने सीबीएसई बोर्ड से दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई की और डीबीएस कालेज से स्नातक किया। उन्होंने यूपीएसई द्वारा 2007 में आयोजित सहायक कमांडेंट परीक्षा पास की थी। इसके बाद ग्रुप डिस्कशन और साक्षात्कार में कामयाबी हासिल कर राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया। शेखर को सीआईएसएफ में सहायक कमांडेंट के पद पर नियुक्ति मिली है। वे 18 अप्रैल को हैदराबाद में सीआईएसएफ ज्वाइन करेंगे। इससे पहले शेखर आठ बार सीडीएस, एक बार आईबी और तीन बार एसआई परीक्षा पास कर चुके हैं। उन्होंने 2008 की सिविल सेवा परीक्षा (प्री) में सफलता प्राप्त की है और वे मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके छह दोस्तों के समूह ने हमेशा एक-दूसरे को मानसिक स्तर पर मजबूत बनाया। जब भी कोई परेशानी आई, एकजुट होकर सामना किया और सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षक अनूप चौहान के मार्गदर्शन, माता-पिता के आशीर्वाद और दोस्तों के सपोर्ट ने उनकी राह आसान की। शेखर ने कहा कि मंजिल अभी दूर है। उन्होंने कहा कि उन्हें अब नौकरी के साथ-साथ आईएएस मुख्य परीक्षा की तैयारी करनी है।
दून से निकला क्रिकेट का द्रोणाचार्य
देहरादून, जागरण प्रतिनिधि: सूबे के क्रिकेटर भी अब राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों की तरह मनमाफिक कोचिंग हासिल कर प्रतिभा निखार सकेंगे। सूबे के वरिष्ठ क्रिकेटर मनोज रावत ने बीसीसीआई द्वारा संचालित लेवल वन कोचिंग कोर्स उत्तीर्ण कर यहां की क्रिकेट को ऊंचाइयों तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। मनोज को इस कोर्स में द्वितीय स्थान हासिल हुआ। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह सूबे के एकमात्र क्रिकेटर हैं। बीसीसीआई की इकाई नेशनल क्रिकेट अकेडमी (एनसीए) के तत्वावधान में तीन से आठ फरवरी तक चले लेवल वन कोचिंग कोर्स में देशभर से 32 खिलाडि़यों ने भाग लिया, जिनमें से 18 ही परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए। श्री रावत को इसमें द्वितीय स्थान मिला। एनसीए के निदेशक डेव व्हाटमोर ने इस कोर्स की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य देशभर में युवा क्रिकेटरों को एकरूप कोचिंग देना है। श्री रावत ने बताया कि कोर्स के दौरान एनसीए के बालिंग कोच बी.अरुण, बैटिंग कोच अमित असवाह, आर.वेंकटराम व किंजल सूरतवाला ने खेल की तकनीकी जानकारी दी। कोर्स में क्रिकेट के बेसिक गुर सिखाए गए। उन्होंने बताया कि टेस्ट में रिटर्न और प्रैक्टिकल दोनों ही तरह परीक्षण किया गया। मनोज रावत ने बताया कि सीएयू की यूपीसीए से संबद्धता होने के कारण एसोसिएशन के सचिव पीसी वर्मा से कोर्स के लिए नाम मांगे गए थे। अगर श्री वर्मा रिकमंड नहीं करते तो शायद वह यह कोर्स नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि पूर्व में वह एनआईएस, एमपीएड और स्पोर्ट्स मैनेजमेंट का कोर्स कर चुके हैं। इसका फायदा उन्हें लेवल वन कोचिंग कोर्स में मिला। एसीए के निदेशक आरपी ईश्र्वरन का भी इसमें काफी सहयोग रहा। एसीए में बतौर कोच कार्यरत मनोज रावत ने कहा कि सूबे को मान्यता मिल जाती है तो अन्य लोग भी यह कोर्स कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के क्रिकेट के विकास में यह काफी सहायक साबित होगा। साथ ही प्रतिभाओं का पलायन रुकेगा।
ढाई करोड़ लीटर पानी जमा करना है 15 तक
मसूरी, जागरण कार्यालय: पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटन सीजन की तैयारियां में जल संस्थान भी लग गया है। सीजन के लिए पंपों की मरम्मत की जा चुकी है। संस्थान 15 अप्रैल तक 2 करोड़ 46 लाख लीटर जल का भंडारण करने में जुटा है। संस्थान ने बकायेदारों से वसूली में भी तेजी कर दी है। पर्यटन सीजन में पहाड़ों की रानी मसूरी में पेयजल किल्लत से बचने के लिए जल संस्थान ने हाथ-पैर मारना शुरू कर दिया है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता एसके शर्मा का कहना है कि पर्यटन सीजन में पेयजल संकट से बचने के लिए कोल्टी पंप, मरे पंप, धोबी घाट समेत अन्य पंपों की मरम्मत की गई है। 15 अप्रैल तक 2 करोड़ 46 लाख लीटर का जल भंडारण किया जाएगा। गनहिल में सर्वाधिक एक करोड़ 58 लाख लीटर, राधाभवन क्रेगटॉप में 80 लाख लीटर, लंढौर कैंट में 8 लाख लीटर पानी का भंडारण किया जाना है। उन्होंने बताया कि जल संस्थान ने बकाएदारों से 31 मार्च तक तीन करोड़ 75 लाख रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा है। अभी तक दो करोड़ से अधिक की वसूली की जा चुकी है। संस्थान के सहायक अभियंता पीबी भट्ट ने बताया कि कोल्टी पंप में अकसर बिजली समस्या रहती थी। इसके लिए 11 केवी की लाइन लगाने को आकलन किया गया है। केंद्र सरकार से पेजयल व्यवस्था के लिए हाल ही में 16 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिनमें कोल्टी पंप के लिए डबल पंपिंग योजना पर तीन करोड़रुपये खर्च किए जाएंगे।
बाजार में लौटी बसंत बहार
मुंबई, एजेंसियां : तमाम सकारात्मक संकेतों के बीच दलाल स्ट्रीट में फिर से वसंत की बहार लौट आई है। शेयर बाजार का बैरोमीटर माना जाने वाला सेंसेक्स करीब तीन महीने बाद गुरुवार को फिर से 10 हजार का स्तर पार कर गया। इस तेजी में अमेरिका में आवास व उपभोक्ता बाजार में आए सुधार का बड़ा हाथ रहा। इसकी वजह से ही विदेशी बाजारों में खासा उछाल आया। इसे देख सटोरियों ने दलाल स्ट्रीट में जमकर लिवाली की। इस दिन बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के संवेदी सूचकांक ने 335.20 अंकों यानी 3.47 फीसदी की छलांग लगाई। यह 10003.10 अंक पर बंद हुआ। 5 जनवरी, 09 के बाद सेंसेक्स पहली बार इस स्तर पर पहुंचा है। एक दिन पहले यह 9667.90 अंक पर बंद हुआ था। चार सत्रों की लगातार तेजी के चलते इस हफ्ते संवेदी सूचकांक 1036.42 अंक यानी 11.56 फीसदी की बढ़त बना चुका है। इसी तरह नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी भी तीन महीने बाद पहली बार 3000 के ऊपर गया। यह 97.90 अंक यानी 3.28 फीसदी उछलकर 3082.25 पर बंद हुआ। बुधवार को यह 2984.35 अंक पर था। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स मजबूती के साथ खुला। सत्र के दौरान यह 10061.36 अंक के ऊंचे स्तर तक गया, वहीं इसने 9739.93 अंक का दिन का निचला स्तर छुआ। निफ्टी एक दिन पहले के मुकाबले नीचे खुला, लेकिन कारोबार के दौरान ऊपर में 3103.35 अंक तक गया। बाद में यह नीचे में 2982.25 के स्तर तक लुढ़का। विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका में एक दिन पहले आए नए घरों की बिक्री और उपभोक्ता बाजार के आंकड़े उम्मीद से अच्छे रहे हैं। इसके चलते विश्व की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मंदी को लेकर बढ़ रही चिंताएं कम हुईं तो वाल स्ट्रीट में एक दिन पहले खासी तेजी आई। इसकी देखादेखी एशियाई बाजार भी मजबूत रहे। इसके अलावा मुद्रास्फीति दर के गिरकर 0.27 फीसदी आने से रिजर्व बैंक द्वारा दरों में और कटौती करने के आसार बढ़ गए हैं। इन सब कारणों से दलाल स्ट्रीट के निवेशक भी जोश में आ गए और जमकर खरीद कर डाली। घरेलू बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से भी लगातार लिवाली का सहारा मिल रहा है। एक दिन पहले उन्होंने 348.65 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। रीयल एस्टेट को छोड़कर इस दिन बीएसई के सभी सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई। रीयल एस्टेट कंपनी आकृति सिटी की शेयरों में आई 55 फीसदी से ज्यादा की गिरावट इस वर्ग के सूचकांक पर भारी पड़ी। बीएसई में कारोबार का आकार भी बढ़कर 4635.28 करोड़ रहा।
चार धाम यात्रा के लिए कंप्यूटरीकृत ग्रीन कार्ड होंगे इस बार
देहरादून: चार धाम यात्रा के लिए परिवहन विभाग की तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार विभाग ने यात्रा पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए कंप्यूटरीकृत ग्रीन कार्ड बनाने का निर्णय लिया है। इससे विभाग के पास यात्रा पर जाने वाली गाड़ी का पूरा ब्योरा उपलब्ध रहेगा। यात्रा के दौरान परिवहन विभाग गाडि़यों के लिए ग्रीन कार्ड जारी करता है। पूर्व में ये कार्ड हाथों से बनाए जाते थे। ऐसे में इनमें गड़बड़ी होने की आशंका भी रहती थी। जांच के दौरान कई ग्रीन कार्ड फर्जी भी पाए गए। ऐसे में फर्जी ग्रीन कार्ड को रोकने और वाहन व चालक का संपूर्ण विवरण एक ही कार्ड में डालने के लिए विभाग ने इस बार ग्रीन कार्डो को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत बनाने का निर्णय लिया है। ग्रीन कार्ड में ड्राइवर के डीएल के साथ ही वाहन संबंधित जानकारी जैसे प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता अवधि, रजिस्ट्रेशन, टैक्स, परमिट, फिटनेस और यात्रा फिटनेस आदि की संपूर्ण जानकारी होगी। यह जानकारी जानकारी कंप्यूटर में भी दर्ज होगी। यात्रा पर चलने वाले स्थानीय वाहनों के अलावा बाहर से आने वाले वाहनों को भी ये कार्ड जारी किए जाएंगे। ग्रीन कार्ड की पहली वैधता तीस जून तक रहेगी। इसके बाद आगे दो-दो माह तक इसकी समय सीमा बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। अपर परिवहन सचिव व अपर आयुक्त विनोद शर्मा ने बताया कि ग्रीन कार्ड का मकसद यह है कि वाहन चालक को एक बार ही सारे कागजात प्रस्तुत न करने पड़ें और जांच में भी विभाग का ज्यादा समय व्यर्थ न हो।
रास्ते के बारे में पता नहीं, चले मंजिल को
विकास गुसाई, देहरादून चार धाम यात्रा के लिए भले ही तैयारियां जोरो पर हों, लेकिन सचाई यह है कि इस बार मार्गो के बिना ठोस सर्वे किए ही यह यात्रा शुरू की जा रही है। बीते वर्ष इन मार्गो पर साढ़े पांच सौ से ज्यादा डेंजर जोन चिह्नित किए गए थे। इन्हीं के आधार पर सुरक्षा की तैयारी की जा रही है। पिछले यात्रा सीजन के बाद हुई बरसात में कई और नए स्थान डेंजर जोन के रूप में उभरे हैं, लेकिन इसकी जानकारी शायद ही विभाग के पास हो। ऐसे में चार धाम यात्रा कितनी सुरक्षित होगी, यह अंदाजा लगाया जा सकता है। चार धाम यात्रा को कुछ ही समय रह गया है। इसके लिए संबंधित महकमों की तैयारियां जोरों पर है। बसों की व्यवस्था से लेकर सड़कों की मरम्मत के लिए परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग व सीमा सड़क संगठन को निर्देश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन इस वर्ष यात्रा से पहले यात्रा रूटों का ठोस सर्वे न तो पुलिस और न ही परिवहन विभाग ने किया है। अभी तक रूट प्लानिंग पुराने डेंजर जोन को ध्यान में रख कर ही की गई है। प्रतिवर्ष परिवहन विभाग और पुलिस अपने-अपने स्तर से चार धाम यात्रा रूटों का सर्वे कराकर तैयारी करते हैं। महकमे इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपते हैं। रिपोर्ट में सड़कों की स्थिति, चौड़ीकरण, पिटवाल, रेलिंग, पैराफिट आदि की स्थिति का उल्लेख होता है। इसी हिसाब से तैयारियां की जाती हैं। देहरादून-गंगोत्री, उत्तरकाशी- यमनोत्री, ऋषिकेश-सोनप्रयाग और हरिद्वार-बदरीनाथ मार्ग का सर्वे किया जाता है। हर वर्ष इन मार्गो पर डेंजर जोनों की संख्या घटती-बढ़ती है। इससे रूट की स्थिति स्पष्ट हो जाती है। इसी आधार पर तैयारियां की जाती हैं। इस वर्ष यात्रा मार्गो पर कितने डेंजर जोन घटे व बढ़े, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। बीते वर्ष के हिसाब से ही तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि अपर परिवहन आयुक्त विनोद शर्मा कहते हैं कि परिवहन आयुक्त व अन्य अधिकारियों के अलावा वे भी यात्रा रूटों की स्थिति का निरीक्षण कर चुके हैं। सीमा सड़क संगठन और लोनिवि को दस अप्रैल तक सभी कार्य दुरुस्त करने के निर्देश दिए जा
