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उत्तराखंड की टिहरी लोकसभा सीट के लिए आगामी 10 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में कांटे की टक्कर होने की संभावना है.
मुख्य मुकाबला दो शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों के वंशजों के बीच होना है. टिहरी लोकसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में 14 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इनमें से भाजपा के टिकट पर अपना भाग्य आजमा रहीं माला राज लक्ष्मी शाह भी हैं. राजलक्ष्मी टिहरी शाही परिवार के वंशज एवं रिकार्ड आठ बार टिहरी से सांसद रहे मानवेंद्र शाह की पुत्रवधु हैं. उनका मुकाबला मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के पौत्र साकेत बहुगुणा से है. साकेत की बुआ रीता बहुगुणा जोशी हाल तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थीं.
उपचुनाव के दोनों मुख्य उम्मीदवारों की ओर से जबर्दस्त चुनाव प्रचार किया जा रहा है. कांग्रेस और भाजपा दोनों चुनावी सभाओं में प्रभावशाली भीड़ का हवाला देते हुए एक-दूसरे पर बढ़त होने के दावे कर रही हैं. भाजपा का मुख्य जोर जहां एक ओर टिहरी के पूर्व शाही परिवार के परंपरागत समर्थकों पर है वहीं राज्य और केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस स्वयं को एक ऐसी पार्टी के रूप में पेश कर रही है जो क्षेत्र में बड़ा निवेश और विकास कर सकती है. कांग्रेस का यह मानना है कि उपुचुनाव में एक अनुकूल बात यह है कि यह लोकसभा सीट पार्टी के पास थी. यह सीट मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के त्यागपत्र के बाद खाली हुई है जिन्होंने सितारगंज विधानसभा सीट से जीत दर्ज करने के बाद यह सीट छोड़ दी थी. कांग्रेस का इसके साथ ही यह भी मानना है कि साकेत की कम आयु उनके पक्ष में काम कर सकती है. उन्होंने राजनीति में आने के लिए एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ अपना अच्छा करियर छोड़ दिया.
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धसमाना ने कहा, ‘हमारा उम्मीदवार युवा और सक्रिय है ही साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी है. उनकी सभा में भारी भीड़ जुट रही है. यह सब इस बात का संकेत है कि वह भारी अंतर से जीत दर्ज करेंगे. बहरहाल भाजपा का मानना है कि साकेत एक राजनीतिक नौसिखिये हैं जिन्हें माला राज लक्ष्मी शाह जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ उतारा गया है. राज लक्ष्मी अपने ससुर मानवेंद्र शाह के चुनावी सभाओं का इंतजाम देखती थीं. विधानसभा में विपक्ष के नेता अजय भट्ट ने कहा, ‘साकेत पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें अपने आप को साबित करना है जबकि हमारी उम्मीदवार अपने ससुर के चुनावी अभियान का प्रबंधन संभालती थीं. उनका मतदाताओं के साथ भावनात्मक सम्पर्क है.
samaylive.com se sabhar











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