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Monday, October 22, 2012

अपने बूते बागवानी कर रहे सेब काश्तकार

http://garhwalbati.blogspot.in

उत्तरकाशी: टकनौर क्षेत्र से जिले के सेब की अंतिम खेप मंडियों की ओर रवाना हो रही है। इस साल उत्पादन औसत रहा और हर बार की तरह काश्तकारों की परेशानियां दूर नहीं हुई। इसके बावजूद वे अपने बूते प्रमुख नगदी फसल को उगा रहे हैं। सरकारी तंत्र की ओर से सेब काश्तकार उपेक्षित ही हैं।
जिले में इस बार करीब 35 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ। इसमें टकनौर क्षेत्र में करीब 10-12 हजार मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया है। यह औसत उत्पादन है, इससे काश्तकार ना तो बहुत नुकसान और ना ही बहुत फायदे की स्थिति में रहे, लेकिन खेती करने में उनकी परेशानियां यथावत ही रही। समय पर बर्फबारी और पर्याप्त नमी के चलते सेब की गुणवत्ता बेहतर रही, लेकिन जरूरी दवाओं को और पेटियों सहित उपज को मंडी तक पहुंचाने को जरूरी सुविधाओं को लेकर असमंजस बना रहा। बरसात के दौरान बाधित हुई सड़कों के चलते भी किसानों ने सेब तुड़ान देरी से शुरू किया। इन सब परेशानियों में सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं मिल पाया। जनपद की इस प्रमुख नगदी फसल की उपेक्षा ही इसकी राह में बाधक बन रहे हैं। इसके चलते काश्तकार निराश हैं। टकनौर क्षेत्र के हर्षिल, धराली, मुखबा, छोलमी आदि गांवों में इन दिनों सेब की अंतिम खेप निकल रही है। जबकि सुक्की व झाला से सितंबर माह के अंत में ही उपज मंडियों की ओर रवाना कर दी गई थी।
jagran.com से साभार 

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