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Thursday, March 31, 2011

स्कूल बने दुकान, अभिभावक हुए परेशान

http://garhwalbati.blogspot.com
प्राइवेट स्कूलों की दुकानदारी अब मनमानी में तब्दील हो गई है। इसके कारण महंगाई के दौर में बच्चों की बेहतर पढ़ाई के सपने बुनते अभिभावक कराहने लगे हैं। बाजार से अधिक दामों पर स्कूल ड्रेस से लेकर रबर पेंसिल तक बेच रहे हैं। इसका असर अभिभावकों के साथ ही स्थानीय व्यापारियों पर भी पड़ रहा है।
जनपद मुख्यालय के स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन स्कूलों का फीस ढांचा और तमाम तरह के खर्चो से बच्चों के अभिभावक परेशान हैं। फीस से इतर स्कूल प्रबंधन बच्चों की ड्रेस, कोर्स की किताबें, कापियां व रबर पेंसिल तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध करवा रहे हैं। वह भी बाजार से कहीं अधिक महंगे दामों पर। नगर क्षेत्र के प्रमुख प्राइवेट स्कूल मसीह दिलासा में पहली कक्षा की किताबों व स्टेशनरी का खर्च पंद्रह सौ रुपए है। कक्षाओं के हिसाब से यह खर्च बढ़कर 1500 से लेकर 3870 रुपए तक पहुंचाया गया है। स्कूल फीस के अलावा दो हजार रुपए की एक स्पेशल फीस भी ली जा रही है। इन स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर बकायदा नोटिस भी लिखा गया है कि 'प्लीज ब्रिंग द एग्जेक्ट मनी फॉर द बुक्स'। जिला मुख्यालय के एक दर्जन से अधिक स्कूलों की दुकानें भी लगभग इसी तरह संचालित हो रही हैं। इस खरीदारी को हर अभिभावक के लिये अनिवार्य कर दिया गया है। बच्चों के भविष्य को लेकर मजबूर अभिभावक दबे स्वर में तो इसका विरोध करते हैं, लेकिन खुलकर कोई सामने नहीं आ सकता। इस स्थिति के कारण अभिभावकों पर महंगाई की दोहरी मार तो पड़ ही रही है। स्थानीय बाजार भी प्रभावित हो रहा है। दुकानदार अब पहले की तरह स्कूलों की सामग्री बेचने में व्यस्त नजर नहीं आ रहे हैं। सरकारी खजाने में जाने वाले सेल टैक्स को भी इससे नुकसान पहुंच रहा है।
डीएम ने भी दिये थे निर्देश
बीते 25 मार्च को जिला मुख्यालय पर उद्योग मित्र संघ की बैठक में भी प्राइवेट स्कूलों की इस मनमानी के खिलाफ आवाज उठी थी। इस पर डीएम डॉ. हेमलता ढौंडियाल ने वाणिज्य कर अधिकारी को जरूरी कार्यवाई के निर्देश दिये थे, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
'प्राइवेट स्कूलों को अनेक बार अभिभावकों को मजबूर न करने को कहा गया है, इन पर हमारा सीधा नियंत्रण न होने के कारण ही यह स्थिति पैदा हो रही है'-डीईओ विश्वनाथ बौद्ध।
'प्राइवेट स्कूलों के पठन पाठन सामग्री बेचे जाने की सूचना मिली है। इस संबंध में जरूरी जानकारियां जुटा कर शीघ्र ही अभियान शुरू कर स्कूलों के मनमानी को रोकने के प्रयास किये जाएंगे'
in.jagran.yahoo.com se sabhar

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